Major BLA attack in Mastung, Balochistan: बलूचिस्तान के मस्तुंग में BLA का घात लगाकर हमला, सुरक्षा काफिला निशाना, कई जवान हताहत

पिछले कुछ हफ्तों में बलूचिस्तान में हमलों की झड़ी, अलगाववादी संगठन बीएलए ने दर्जनों हमलों की ली जिम्मेदारी

Major BLA attack in Mastung, Balochistan:  क्वेटा/इस्लामाबाद।पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बार फिर मस्तुंग जिले को निशाना बनाते हुए सुरक्षा बलों के काफिले पर बड़ा हमला किया है। 16 जुलाई को हुए इस हमले में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया कि क्वेटा से कलात जा रहे फ्रंटियर कोर के काफिले पर एन-25 हाईवे पर हमला हुआ, जिसमें तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए और 29 अन्य घायल हो गए। सूत्रों के मुताबिक, हमलावरों ने कई जगहों पर एक साथ काफिले पर हमला बोला, और घटनास्थल पर पहुंची अतिरिक्त सुरक्षा टुकड़ी भी आईईडी धमाके की चपेट में आ गई। इस हमले में 20 जवानों को गंभीर और नौ को मामूली चोटें आईं। हालांकि किसी संगठन ने तत्काल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन सुरक्षा सूत्रों ने इसका शक बीएलए पर जताया है।

15 दिनों में 48 हमलों का दावा

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब बीएलए ने खुद बलूचिस्तान भर में बीते करीब दो हफ्तों में दर्जनों हमले किए जाने का दावा किया है। संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलोच के हवाले से जारी बयानों के अनुसार, 1 से 14 जुलाई के बीच मस्तुंग, नुश्की, केच, सुराब, खुजदार, जियारत, खारन और कलात जिलों में सैन्य काफिलों, चौकियों, पुलों और आपूर्ति मार्गों को निशाना बनाते हुए सशस्त्र हमले और आईईडी धमाके किए गए। बीएलए के दावे के मुताबिक इन 48 हमलों में 40 से ज्यादा पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए, हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। संगठन के दावों के अनुसार 1 जुलाई को मस्तुंग के दश्त इलाके में एक सैन्य आपूर्ति वाहन पर हमले में दो सैनिक मारे गए, जबकि 3 जुलाई को नुश्की और मस्तुंग में हुए आईईडी धमाकों में कम से कम दो और सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया गया, साथ ही एक पुल को भी नुकसान पहुंचाया गया। बीएलए ने 7 जुलाई को हरनाई के पास खलीफत क्षेत्र में सबसे भीषण झड़प होने का भी दावा किया, जिसमें कई सैनिकों के मारे जाने और एक अहम पुल के उड़ाए जाने की बात कही गई।

जुलाई की शुरुआत में भी बड़ा हमला

गौरतलब है कि 4 से 8 जुलाई के बीच भी बलूचिस्तान में समन्वित हमलों की एक बड़ी लहर देखी गई थी। पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बीएलए के संयुक्त गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया था। इस दौरान कुल 42 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 38 सुरक्षाकर्मी और चार आम नागरिक शामिल थे। जियारत जिले में एक चौकी पर हुए हमले में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था, जहां 11 सैनिक मारे गए थे, जिनमें एक जूनियर कमीशंड अधिकारी भी शामिल था, और सेना के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में 14 उग्रवादी मारे गए थे। इस दौरान बंधक बनाए गए 18 पुलिसकर्मियों की भी हत्या की खबर आई थी, जिससे पुलिस बल का कुल हताहत आंकड़ा 27 तक पहुंच गया था। सेना ने बताया था कि इन चार दिनों में जवाबी अभियानों में कुल 54 उग्रवादी मारे गए।

पहले भी हो चुके हैं बड़े हमले

बलूचिस्तान में बीएलए और अन्य अलगाववादी गुटों के हमलों का सिलसिला नया नहीं है। इससे पहले फरवरी 2026 में क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग और नुश्की जिलों में लगभग एक साथ हुए हमलों में करीब 50 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर चलाए गए अभियान में कम से कम 145 उग्रवादियों को मार गिराने का दावा किया था। जनवरी 2025 में भी तुरबत के पास एक सैन्य काफिले पर बीएलए के आत्मघाती हमले में करीब 47 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर आई थी।

पृष्ठभूमि: क्यों निशाने पर है बलूचिस्तान?

अफगानिस्तान और ईरान से सीमा साझा करने वाला बलूचिस्तान प्रांत खनिज संपदा और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। लेकिन यही प्रांत दशकों से अलगाववादी विद्रोह से जूझ रहा है। बीएलए जैसे संगठन ज्यादा स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों में बड़ा हिस्सा मांगते रहे हैं, जबकि इस्लामाबाद इन संगठनों को भारतीय खुफिया एजेंसियों का “प्रॉक्सी” बताता रहा है, एक आरोप जिसे नई दिल्ली लगातार खारिज करता रहा है। ताजा हमलों के बाद बलूचिस्तान में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किए जाने की खबर है। हालांकि, बार-बार हो रहे इन हमलों ने प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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