Puri Rath Yatra accident: भारी भीड़ और बारिश में मची अफरा-तफरी, दो श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत; सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

Puri Rath Yatra accident: नई दिल्ली/भुवनेश्वर,ओडिशा की पवित्र नगरी पुरी में जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा 2026 गुरुवार को शुरू हुई, लेकिन भारी बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ में मची अफरा-तफरी ने उत्सव को दुखांत बना दिया। ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर भीड़ उमड़ने और धक्का-मुक्की से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग बीमार पड़े या घायल हो गए। रथ खिंचाई अस्थायी रूप से रोक दी गई और शुक्रवार को एक बार फिर से रथ यात्रा निकाली गई है।

हादसे का विस्तार

रथ यात्रा शुरू होते ही भारी बारिश के बीच लाखों श्रद्धालु रथों के पास जमा हो गए। भीड़ बेकाबू होने से कुछ श्रद्धालु घुटन और धक्का-मुक्की का शिकार हुए। ओडिशा सरकार के बयान के अनुसार, एक 60 वर्षीय श्रद्धालु श्वास रुकने से और दूसरा हृदयाघात से मारा गया। लगभग 100 श्रद्धालु विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई गई। फायर सर्विसेज के आईजी उमाशंकर दास ने बताया कि करीब 100 लोगों को भीड़ से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। कुछ ने दावा किया कि VIP और प्रशासनिक व्यवस्था पर ज्यादा फोकस था, जबकि आम श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग या मेडिकल टीमें मौके पर नहीं थीं। पीड़ित परिवारों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे और जवाबदेही की मांग की है।

देशभर में रथ यात्रा उत्सव

पुरी के अलावा देशभर में जगन्नाथ रथ यात्रा धूमधाम से मनाई गई। पटना में ISKCON की 40 फीट ऊंची हाइड्रॉलिक रथ यात्रा ने आकर्षित किया, जहां दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। प्रयागराज, अहमदाबाद, सीहोर, बूंदी समेत कई शहरों में रथ निकाले गए। इन आयोजनों में सामान्य रूप से शांति रही, लेकिन पुरी की घटना ने पूरे देश में चिंता पैदा कर दी।

नेताओं के बयान

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घटना पर दुख जताया और मुआवजे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जांच के आदेश दिए गए हैं। विपक्षी नेताओं समेत अन्य दलों ने भी संवेदना व्यक्त की और बेहतर भीड़ प्रबंधन की मांग की। पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने पिछले वर्षों की तरह इस बार भी प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए।

पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा पोल

मृतकों के परिजनों ने गुस्सा जताते हुए कहा कि बारिश और भीड़ के बावजूद पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। एक परिजन ने बताया, “भीड़ इतनी थी कि सांस लेना मुश्किल हो गया। एम्बुलेंस दूर थीं।” कई श्रद्धालुओं ने VIP एंट्री और सामान्य व्यवस्था पर असंतोष व्यक्त किया। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्षों के हादसों के बावजूद भीड़ प्रबंधन में सुधार की जरूरत है। सरकार ने 12,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी, CCTV, ड्रोन और इवैक्यूएशन कॉरिडोर लगाए थे, लेकिन भारी बारिश ने चुनौती बढ़ा दी।

विश्लेषण और आगे की राह

रथ यात्रा आस्था का प्रतीक है, लेकिन भीड़ प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान और मेडिकल तैयारियों में और मजबूती लाने की जरूरत है। ओडिशा सरकार ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसे हादसे न हों। श्रद्धालुओं की मांग है कि महाप्रभु जगन्नाथ की यात्रा शांति और सुरक्षा से संपन्न हो।

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