Delhi: आजकल देश के वाहन चालकों के बीच एक बड़ी शिकायत आम हो चुकी है—“गाड़ी पहले जैसा माइलेज नहीं दे रही और बार-बार मैकेनिक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।” इस समस्या के पीछे सबसे बड़ा कारण पेट्रोल में मिलाए जा रहे एथनॉल (Ethanol Blending) को माना जा रहा है। भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए पेट्रोल में 20% तक एथनॉल मिलाने (E20 Fuel) का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके व्यावहारिक साइड-इफेक्ट्स अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं।
विभिन्न ऑटोमोबाइल रिपोर्ट्स, मैकेनिकों के अनुभवों और ऑटोकार इंडिया जैसे एक्सपर्ट सोर्सेज के आधार पर आइए समझते हैं कि एथनॉल आपकी गाड़ी पर क्या असर डाल रहा है, साथ ही जानेंगे कि इसका इतिहास क्या है और दुनिया की पहली गाड़ी कब बनी थी।
1. एथनॉल मिक्स पेट्रोल से माइलेज क्यों कम हो रहा है?
एथनॉल असल में गन्ने, मक्के या अनाज से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है। पेट्रोल के मुकाबले इसमें एनर्जी डेंसिटी (ऊर्जा घनत्व) लगभग 30% कम होती है।
-
अधिक ईंधन की खपत: चूंकि एथनॉल में ऊर्जा कम होती है, इसलिए इंजन को उतनी ही ताकत (पावर) पैदा करने के लिए ज्यादा ईंधन जलाना पड़ता है।
-
टेस्ट में गिरावट की पुष्टि: ‘ऑटोकार इंडिया’ द्वारा किए गए रियल-वर्ल्ड टेस्ट के अनुसार, सामान्य पेट्रोल (E10) से E20 पेट्रोल पर शिफ्ट होने पर गाड़ियों के माइलेज में 3% से लेकर 12% तक की गिरावट देखी गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग 20% तक माइलेज गिरने का दावा भी करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट औसतन 6 से 10% के बीच है।
2. इंजन की लाइफ और पार्ट्स क्यों हो रहे हैं जल्दी खराब?
यदि आपकी गाड़ी अप्रैल 2023 से पहले की बनी है, तो एथनॉल मिक्स पेट्रोल उसके लिए किसी धीमे जहर से कम नहीं है। इसके पीछे एथनॉल की रासायनिक प्रकृति (Chemical Properties) है:
-
पार्ट्स का गलना और जंग लगना: एथनॉल स्वभाव से अत्यधिक संक्षारक (Corrosive) होता है। यह पुरानी गाड़ियों के ईंधन टैंक, रबर की पाइपलाइनों, सील (Seals), फ्यूल पंप और इंजेक्टर्स को धीरे-धीरे गलाने लगता है।
-
मॉयस्चर (नमी) सोखना: एथनॉल हवा से नमी (पानी) को बहुत तेजी से सोखता है। यदि गाड़ी कुछ दिनों तक खड़ी रहे, तो फ्यूल टैंक के अंदर पानी जमा हो जाता है, जिससे टैंक में जंग लगती है और इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत (Cold Start Problem) आती है।
-
इंजन कंपोनेंट्स पर असर: इसके चलते इंजन के इंटरनल पार्ट्स की लाइफ कम हो रही है, जिससे पिस्टन और वॉल्व जल्दी खराब हो रहे हैं।
नोट: अप्रैल 2023 के बाद बनी गाड़ियां E20 कंप्लायंट (एथनॉल अनुकूल) हैं। उनके इंजन और पाइप्स में ऐसी धातुओं और रबर का इस्तेमाल किया गया है जो एथनॉल को झेल सकें, लेकिन पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए यह बड़ी मुसीबत बना हुआ है।
3. एथनॉल ईंधन का इतिहास: कब हुआ पहली बार इस्तेमाल?
कई लोगों को लगता है कि एथनॉल एक नया आविष्कार है, लेकिन ऐसा नहीं है। वाहनों में एथनॉल का इतिहास पेट्रोल जितना ही पुराना है:
-
1826 (शुरुआती प्रयोग): अमेरिकी आविष्कारक सैमुअल मोरे (Samuel Morey) ने सबसे पहला आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine) बनाया था, जिसे उन्होंने एथनॉल और तारपीन के तेल के मिश्रण से चलाया था।
-
1860 से 1876: आधुनिक फोर-स्ट्रोक इंजन के जनक निकोलस ओटो (Nicolaus Otto) ने अपने शुरुआती इंजनों में एथनॉल का ही उपयोग किया था।
-
1908 (हेनरी फोर्ड की दूरदर्शिता): जब प्रसिद्ध कार निर्माता हेनरी फोर्ड ने अपनी ऐतिहासिक Model T कार पेश की, तो उसे एक ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ (Flex-Fuel) वाहन के रूप में डिजाइन किया गया था। वह कार पेट्रोल, एथनॉल या दोनों के मिश्रण पर चल सकती थी। फोर्ड का मानना था कि एथनॉल भविष्य का ईंधन बनेगा, लेकिन बाद में बेहद सस्ता कच्चा तेल (Petroleum) मिलने के कारण एथनॉल पीछे छूट गया।
-
1970 का दशक: ब्राजील ने दुनिया में सबसे पहले बड़े पैमाने पर एथनॉल को पेट्रोल में मिलाने की शुरुआत की। आज ब्राजील में 100% एथनॉल पर चलने वाली गाड़ियां (Pure Ethanol Vehicles) भी आम हैं।
4. दुनिया की पहली गाड़ी का आविष्कार कहाँ और कब हुआ?
यदि आधुनिक ऑटोमोबाइल या कार के आविष्कार की बात करें, तो इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
-
आविष्कारक और देश: दुनिया की पहली सफल पेट्रोल से चलने वाली कार का आविष्कार जर्मनी में हुआ था। इसके आविष्कारक कार्ल बेंज (Karl Benz) थे।
-
वर्ष 1886: कार्ल बेंज ने 29 जनवरी 1886 को अपनी तीन पहियों वाली गाड़ी “बेंज पेटेंट-मोटरवैगन” (Benz Patent-Motorwagen) का पेटेंट कराया था। इसे ही दुनिया की पहली वास्तविक कार माना जाता है। इसमें गैसोलिन (पेट्रोल) से चलने वाला सिंगल-सिलेंडर इंजन लगा था।
वाहन चालकों के लिए काम की सलाह
अगर आपके पास पुरानी गाड़ी है, तो एथनॉल के नुकसान से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
-
अपनी गाड़ी को लंबे समय तक ईंधन टैंक खाली करके न छोड़ें, ताकि नमी न बन पाए।
-
समय-समय पर अधिकृत सर्विस सेंटर से फ्यूल लाइन्स और इंजेक्टर्स की सफाई करवाते रहें।
-
ईंधन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसी अच्छे ब्रांड के ‘फ्यूल एडिटिव’ (Fuel Additive) का इस्तेमाल डॉक्टर या मैकेनिक की सलाह पर कर सकते हैं।

