नई दिल्ली | मध्य-पूर्व में जारी ईरान युद्ध के वैश्विक परिणामों ने अब भारत के हज यात्रियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हज कमेटी ऑफ इंडिया (अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अधीन) ने घोषणा की है कि ईरान विवाद के कारण वैश्विक स्तर पर विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसके चलते हज यात्रा के हवाई किराए में 10,000 रुपये की वृद्धि की जा रही है।
सरकार के इस फैसले ने इस साल मुकद्दस सफर पर जाने वाले जायरीनों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है, वहीं विपक्ष ने इसे ‘आर्थिक शोषण’ करार देते हुए वापस लेने की मांग की है।
किराया बढ़ाने का मुख्य कारण: ATF की कीमतों में उछाल
सरकारी सर्कुलर के अनुसार, 28 फरवरी, 2026 को ईरान युद्ध छिड़ने के बाद से वैश्विक बाजार में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं। विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि:
- परिचालन लागत: किसी भी एयरलाइन की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 30% से 40% हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है।
- वैश्विक संकट: मध्य-पूर्व के हवाई क्षेत्रों के बंद होने और कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से हवाई यात्राएं महंगी हो गई हैं।
- अनिवार्य बदलाव: सरकार ने इसे ‘एक बार का जरूरी बदलाव’ (One-time adjustment) बताया है ताकि एयरलाइंस अपनी सेवाओं को सुचारू रूप से जारी रख सकें।
हज कमेटी का नया फरमान: मुख्य बिंदु
हज कमेटी द्वारा जारी किए गए संशोधित निर्देशों के अनुसार, भुगतान की शर्तें निम्नलिखित हैं:
| मद | विवरण |
|---|---|
| अतिरिक्त राशि | प्रति जायरीन 100 USD (लगभग 10,000 रुपये) |
| किसे देना होगा? | भारत के किसी भी एम्बार्केशन पॉइंट (प्रस्थान बिंदु) से जाने वाले सभी यात्रियों को। |
| अंतिम तिथि | अंतर की यह राशि 15 मई तक जमा करनी अनिवार्य है। |
सियासी उबाल: विपक्ष और ओवैसी का कड़ा रुख
इस फैसले के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में विरोध शुरू हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है।
“जायरीनों पर 10,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना सरासर शोषण है। सरकार को चाहिए कि वह इस संकट के समय में यात्रियों को राहत दे, न कि उन पर वित्तीय बोझ बढ़ाए। हम मांग करते हैं कि इस सर्कुलर को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।” — असदुद्दीन ओवैसी
विपक्षी दलों का तर्क है कि हज यात्रा के लिए बजट और टेंडर प्रक्रिया बहुत पहले पूरी हो जाती है, ऐसे में यात्रा के ऐन वक्त पर किराया बढ़ाना जायरीनों के साथ अन्याय है।
जायरीनों में रोष और असमंजस
15 मई की समयसीमा ने कई परिवारों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए, जिन्होंने जीवन भर की जमापूंजी हज के लिए लगाई है, अचानक 10,000 रुपये प्रति व्यक्ति का इंतजाम करना मुश्किल साबित हो रहा है। जायरीनों का कहना है कि सरकार को युद्ध की स्थिति का बोझ आम जनता पर डालने के बजाय सब्सिडी या अन्य माध्यमों से इसका समाधान निकालना चाहिए था।
निष्कर्ष: फिलहाल, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने किराए में कटौती के कोई संकेत नहीं दिए हैं। यदि सरकार अपने रुख पर कायम रहती है, तो हजारों जायरीनों को 15 मई तक अतिरिक्त राशि जमा करानी होगी, अन्यथा उनकी यात्रा पर असर पड़ेगा।

