ईरान और ट्रंप जंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के साथ पिछले महीने साइन किए गए अंतरिम समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) को पूरी तरह समाप्त घोषित कर दिया है। इस घोषणा के साथ ही हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ट्रंप ने NATO नेताओं से कहा कि वे ईरानी नेतृत्व को “बीमार लोग” मानते हैं और अब तेहरान के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने स्पेन के साथ व्यापार कटौती की भी धमकी दी। यह बयान तुर्की की राजधानी अंकारा में चल रहे NATO शिखर सम्मेलन के दौरान आया, जहां मूल रूप से रक्षा व्यय बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध पर चर्चा होनी थी, लेकिन ईरान संकट ने पूरी एजेंडा बदल दी।
हार्मुज में हमले और अमेरिकी जवाबी कार्रवाई
सोमवार को हार्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले हुए, जिनमें कतारी LNG टैंकर और सऊदी टैंकर शामिल थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे ईरानी हमले बताया और मंगलवार को ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर “शक्तिशाली हमले” किए। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय राडार, मिसाइल साइट्स और IRGC की छोटी नावें शामिल थीं। ईरान ने जवाब में बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का दावा किया है। तेहरान ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन गिराने का भी दावा किया। इस घटनाक्रम से जून में इस्लामाबाद में साइन किया गया अंतरिम समझौता, जिसमें हार्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरानी तेल निर्यात की अनुमति देने का प्रावधान था, पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
पृष्ठभूमि: 2026 का ईरान युद्ध
फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद युद्ध शुरू हुआ था। ईरान ने जवाब में हार्मुज बंद करने, इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। अप्रैल में अस्थायी संघर्षविराम हुआ, लेकिन जून में इस्लामाबाद मेमोरेंडम के तहत 60 दिनों का अंतरिम समझौता साइन हुआ, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत होनी थी। ट्रंप ने शुरू में इस समझौते को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया था, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे विफल कर दिया। अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री की लाइसेंस रद्द कर दी है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
NATO शिखर सम्मेलन पर असर
अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने सहयोगियों पर दबाव बनाया कि वे ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ दें और रक्षा व्यय बढ़ाएं। कई यूरोपीय देशों ने अमेरिकी हमलों के लिए अपने ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार किया था, जिससे ट्रंप नाराज हैं। तुर्की राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगान ने शिखर की मेजबानी की। NATO महासचिव मार्क रुट्टे और अन्य नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता जताई। UAE के एक वरिष्ठ राजनयिक ने ईरान के हमलों की निंदा की और कहा कि तेहरान शांति की शर्तों का पालन करने में असमर्थ है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह नया उग्र चरण ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गहरी अनिश्चितता पैदा कर रहा है। ईरान ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता अस्वीकार कर दी है, जबकि ट्रंप “कैंसर को जड़ से खत्म” करने की बात कर रहे हैं। वैश्विक बाजारों में तेल कीमतें बढ़ रही हैं और समुद्री सुरक्षा चेतावनियां जारी की गई हैं। स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और आगे की घटनाएं मध्य पूर्व के भविष्य को तय करेंगी।
यह भी पढ़ें: फतेहपुर न्यूज़: पत्नी बनी ‘जल्लाद’, पति को चारपाई से बांधकर रातभर दिए झटके, हालत गंभीर

