नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से पहली व्यावसायिक उड़ान का ऐतिहासिक कार्यक्रम भले ही सफल रहा, लेकिन इसी आयोजन ने भाजपा के अंदर लंबे समय से धीमी आंच पर पक रही अंदरूनी असंतोष को अब खुलकर सामने ला दिया है। कार्यक्रम में गौतमबुद्ध नगर के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को औपचारिक निमंत्रण न मिलने से पार्टी में नाराजगी की लहर दौड़ गई है। नाराज नेताओं ने इसकी शिकायत सीधे पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा दी है। सूत्रों के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर सांसद डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, दादरी विधायक तेजपाल नागर, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसौदिया, जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, विधान परिषद सदस्य नरेंद्र भाटी, श्रीचंद शर्मा और जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी जैसे प्रमुख चेहरे इस कार्यक्रम से बाहर रखे गए। इससे स्थानीय स्तर पर पार्टी संगठन में खलबली मच गई है।
क्षेत्रीय अध्यक्ष ने सीएम को दी जानकारी
भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसौदिया ने पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी। इसके बाद मामला गंभीर हो गया और केंद्र व प्रदेश स्तर पर पार्टी नेतृत्व ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह को राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर का करीबी माना जाता है, फिर भी उन्हें निमंत्रण नहीं मिला। सवाल उठ रहा है कि कार्यक्रम में केवल यमुना प्राधिकरण के सीईओ और जेवर विधायक को प्रमुखता क्यों दी गई, जबकि क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई।
प्रभारी मंत्री का बचाव
जिले के प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह ने विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री के निर्देश पर केंद्रीय राज्य मंत्री के स्वागत के लिए कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि यह आयोजन यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) का था। उन्होंने यमुना प्राधिकरण के सीईओ से जनप्रतिनिधियों के निमंत्रण के बारे में पूछा तो बताया गया कि सभी के संपर्क नंबर प्रबंधन को उपलब्ध करा दिए गए थे। बृजेश सिंह ने दावा किया कि उनका सभी जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय है और वे 22 या 23 जून को लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से पूरे मामले पर चर्चा करेंगे।
प्राधिकरणों की हिस्सेदारी का मुद्दा
नाराज नेताओं का तर्क है कि नोएडा प्राधिकरण की 37.5 प्रतिशत और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 12.5 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद इनके कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यमुना प्राधिकरण और एयरपोर्ट प्रबंधन ने चुनिंदा लोगों को ही आमंत्रित किया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा
राजनीतिक गलियारों में अब सबकी नजर 22-23 जून को होने वाली बैठक पर है, जिसमें प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेंगे। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि यह प्रशासनिक चूक थी या कोई राजनीतिक रणनीति। जेवर एयरपोर्ट से पहली व्यावसायिक उड़ान (इंडिगो) हाल ही में लखनऊ से आई, जिसमें भूमि देने वाले किसानों को विशेष रूप से शामिल किया गया यह एक प्रतीकात्मक कदम था। एयरपोर्ट का उद्घाटन मार्च 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था, जो यूपी की विकास यात्रा का बड़ा प्रतीक है।3यह घटना भाजपा की आंतरिक एकता और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़ा करती है, खासकर जब पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। पार्टी हाईकमान इस मामले को जल्द सुलझाने की कोशिश में है ताकि विकास की छवि पर कोई आंच न आए।

