मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के री-एग्जाम से ठीक पहले केंद्र सरकार ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया। यह कदम परीक्षा पेपर लीक और धोखाधड़ी से जुड़े चैनलों को रोकने के लिए उठाया गया है।मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला IT मंत्रालय और टेलीग्राम के बीच लंबे टकराव का नतीजा है, जिसमें सरकार ने ऐप को CSAM (चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मटेरियल), साइबर अटैक्स, टेरर प्रोपगैंडा और फाइनेंशियल फ्रॉड का हब बताया है। सरकार की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में टेलीग्राम को “नया डार्क वेब” करार दिया गया है। हलफनामे के मुताबिक, ऐप की प्राइवेसी और एनॉनिमिटी फीचर्स अपराधियों, साइबर फ्रॉडस्टर्स, एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप्स और टेररिस्टों के लिए आकर्षक बन गए हैं। उपयोगकर्ता फोन नंबर और आईडी छिपा सकते हैं, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टेलीग्राम चैनल्स और ग्रुप्स के जरिए लीक परीक्षा पेपर बेचे जा रहे थे, म्यूल बैंक अकाउंट्स की खरीद-बिक्री हो रही थी, मालवेयर और हैकिंग टूल्स शेयर किए जा रहे थे, साथ ही पायरेटेड कंटेंट, ड्रग ट्रैफिकिंग और चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन मटेरियल भी फैलाया जा रहा था।
NEET घोटाले की पृष्ठभूमि
मई 2026 में NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों के बाद लाखों छात्रों के रिजल्ट रद्द कर दिए गए थे, जिससे देशव्यापी आंदोलन और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। NTA ने री-एग्जाम 21 जून को कराने का फैसला किया। सरकार का कहना है कि “NEET PAPER LEAKED” जैसे चैनलों पर धोखेबाज पूरे पेपर देने का दावा कर पैसे मांग रहे थे। IT मंत्रालय ने टेलीग्राम पर “निष्क्रियता” का आरोप लगाते हुए 16 जून को 22 जून तक ब्लॉक करने का आदेश जारी किया। यह भारत में अब तक का अभूतपूर्व कदम है। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने इस फैसले की आलोचना की और कहा कि “लीक्स तो अन्य ऐप्स पर चले जाएंगे”। कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ब्लॉक को चुनौती दी है, जिसमें दावा किया गया है कि यह संवैधानिक अधिकारों और फ्री स्पीच का उल्लंघन है। टेलीग्राम ने सरकार की मीटिंग मिनट्स को “एकतरफा और गलत” बताया।
सरकार के बड़े आरोप
हलफनामे में विस्तार से आरोप लगाए गए:
चाइल्ड पोर्न और CSEAM: टेलीग्राम चैनल्स और ग्रुप्स के जरिए चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मटेरियल फैलाया जा रहा है।
साइबरक्राइम: फेक अकाउंट्स से फाइनेंशियल स्कैम, डेटा ब्रिच, मालवेयर डिस्ट्रीब्यूशन और कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के रूप में इस्तेमाल।
टेररिज्म: टेरर ऑर्गेनाइजेशन्स से जुड़े प्रोपगैंडा और हिंसक कंटेंट।
अन्य: पिरेटेड मूवीज, ड्रग्स और कॉपीराइट उल्लंघन।राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर टेलीग्राम से जुड़ी शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।1
दोनों पक्षों की दलीलें
टेलीग्राम का दावा है कि वह अवैध कंटेंट के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करता है और सरकार की मिनट्स गलत हैं। कंपनी ने कहा कि परीक्षा से जुड़े “सब्जेक्टिव” कंटेंट को प्रोएक्टिवली डिटेक्ट करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वह CSAM और पोर्न जैसी “ऑब्जेक्टिव” समस्याओं पर सक्रिय है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि टेलीग्राम ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए। भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, जो इसे देश का सबसे बड़ा बाजार बनाता है। ऐप की बड़ी ग्रुप कैपेसिटी (2 लाख सदस्य) और नंबर छिपाने की सुविधा इसे अपराधियों के लिए आकर्षक बनाती है।
व्यापक संदर्भ और प्रभाव
यह विवाद टेक कंपनियों और मोदी सरकार के बीच बढ़ते टकराव का हिस्सा है। इससे पहले X (पूर्व ट्विटर) के साथ भी कानूनी लड़ाई हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि एनोनिमस प्लेटफॉर्म्स अपराध को बढ़ावा दे सकते हैं, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक फ्री स्पीच और लाखों निर्दोष यूजर्स को प्रभावित करता है। टेलीग्राम ने कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है और मामला आजकल सुनवाई के अधीन है। सरकार NEET री-एग्जाम को सुरक्षित कराने के लिए एयर फोर्स की मदद से पेपर डिलीवरी जैसी सख्त व्यवस्थाएं भी कर रही है। यह घटनाक्रम परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और यूजर्स की प्राइवेसी के बीच संतुलन की बहस को फिर से तेज कर रहा है। आगे की सुनवाई और टेलीग्राम पर स्थायी कार्रवाई इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।

