Ferrari Luce EV: फेरारी की पहली इलेक्ट्रिक कार 382 करोड़ में बिकी, जानें फीचर्स और खरीदार का नाम

Ferrari Luce EV: दुनिया की मशहूर स्पोर्ट्स कार निर्माता कंपनी फेरारी की पहली पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार ने नीलामी में नया रिकॉर्ड बना दिया है। कंपनी के इस पहले EV मॉडल ‘फेरारी ल्यूस चैसी 0’ को अमेरिका में हुई एक चैरिटी नीलामी में करीब चार करोड़ डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 382 करोड़ रुपये में खरीदा गया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह रकम कार की अनुमानित असल कीमत से करीब 35 गुना ज्यादा है, जिसने इसे अब तक बिकी सबसे महंगी नई कार बना दिया है।

नीलामी और चैरिटी से जुड़ाव

इस कार की नीलामी प्रतिष्ठित नीलामी संस्था सोदेबी ने कराई। नीलामी से जुटाई गई पूरी राशि फेरारी फाउंडेशन के शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में खर्च की जाएगी। आयोजकों ने आधिकारिक तौर पर खरीदार का नाम उजागर नहीं किया, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने रजिस्ट्री दस्तावेजों के हवाले से खरीदार की पहचान की पुष्टि करने का दावा किया है।

क्या है इस कार में खास

फेरारी ल्यूस कंपनी के इतिहास की पहली शत-प्रतिशत बैटरी से चलने वाली कार है और इसे ब्रांड के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में कदम रखने का प्रतीक माना जा रहा है। इसे ‘चैसी 0’ नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक मॉडल श्रृंखला की पहली प्रोडक्शन यूनिट है, जिस पर पहचान के लिए विशेष प्लेट और फेरारी का सिग्नेचर घोड़े वाला लोगो लगाया गया है।

इस कार का डिजाइन एपल के पूर्व चीफ डिजाइन ऑफिसर और आईफोन के जनक सर जॉनी आइव के डिजाइन स्टूडियो लवफ्रॉम के सहयोग से तैयार किया गया है। कार की बॉडी पर एक खास सेमी-ग्लॉस पेंट फिनिश लगाई गई है, जो रोशनी के कोण के हिसाब से हरे से बैंगनी रंग के बीच बदलती नजर आती है। इस जटिल पेंटिंग प्रक्रिया के कारण इस मॉडल की कोई भी दो कारें एक जैसी नहीं दिखतीं। केबिन में प्रीमियम स्विस लेदर और इंटीरियर के लिए एक नया ग्रे शेड इस्तेमाल किया गया है, जो पहली बार किसी फेरारी मॉडल में देखा गया है। यह चार दरवाजों और पांच सीटों वाली इलेक्ट्रिक ग्रैंड टूरर कार है। इसकी असेंबली इटली के मारानेलो प्लांट में होगी और डिलीवरी 2027 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है।

परफॉर्मेंस के आंकड़े

फेरारी ल्यूस में चार अलग-अलग इलेक्ट्रिक मोटर हैं, यानी हर पहिए पर एक स्वतंत्र मोटर। यह सेटअप मिलकर कुल 1,050hp पावर और 990Nm टॉर्क पैदा करता है। कंपनी के अनुसार यह कार एक फुल चार्ज में करीब 550 किलोमीटर तक चल सकती है। इसमें तीन ड्राइविंग मोड दिए गए हैं—रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए रेंज मोड, आरामदायक सफर के लिए टूर मोड और पूरी ताकत के लिए परफॉर्मेंस मोड। लॉन्च कंट्रोल एक्टिवेट करने पर यह महज 2.5 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है, जबकि इसकी टॉप स्पीड 310 किमी/घंटा तक जाती है।

कौन हैं बिलेनियर खरीदार

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कार को खरीदने वाले अमेरिकी अरबपति हर्बर्ट “डॉ. हर्बी” वर्थहाइम बताए जा रहे हैं, जो अपने चमकीले लाल फेडोरा हैट से पहचाने जाते हैं। वे पेशे से नेत्र रोग विशेषज्ञ, आविष्कारक और अनुभवी निवेशक हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग पांच अरब डॉलर आंकी जाती है।

फिलाडेल्फिया में जन्मे वर्थहाइम का बचपन कठिनाइयों से भरा रहा। किशोरावस्था में घर छोड़ने के बाद उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए और 17 साल की उम्र में अमेरिकी नौसेना ज्वाइन कर ली। इसके बाद उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई की, नासा में इंजीनियर के तौर पर काम किया और फिर ऑप्टोमेट्री में करियर बनाया। 1969 में उन्होंने आंखों को यूवी किरणों और मोतियाबिंद से बचाने वाला एक खास लेंस टिंट ईजाद किया, जिसके बलबूते उन्होंने 1970 में ब्रेन पावर नाम की कंपनी शुरू की, जिसके पास आज सैकड़ों पेटेंट हैं।

निवेश के मोर्चे पर भी वर्थहाइम का रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्होंने एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल जैसी कंपनियों में शुरुआती दौर में निवेश किया। एयरोस्पेस पार्ट्स बनाने वाली कंपनी हाइको में किया गया उनका पुराना निवेश आज करोड़ों डॉलर का हो चुका है। वे गिविंग प्लेज पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दान भी करते हैं। फेरारी कारों के भी वे बड़े शौकीन रहे हैं। इससे पहले उन्होंने फेरारी डेटोना एसपी3 का एक कस्टमाइज्ड मॉडल भी नीलामी में करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदा था। इस बार उन्होंने अपनी ही पुरानी बोली को पीछे छोड़ते हुए फेरारी ल्यूस को अपने नाम कर लिया।

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