Mahua Moitra News: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की एक अदालत ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। कई बार समन भेजे जाने के बावजूद सांसद अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुईं, जिसके बाद अदालत ने यह सख्त कदम उठाया।
कोलकाता/कृष्णनगर, कृष्णनगर लोकसभा सीट से सांसद महुआ मोइत्रा के लिए बुधवार का दिन कानूनी मोर्चे पर भारी साबित हुआ। नादिया जिला अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह वारंट उस मामले में जारी हुआ है, जिसमें कृष्णनगर के घूर्णि इलाके की कुछ महिलाओं ने सांसद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मोइत्रा ने समय-समय पर आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणियां कीं, जिनमें हिंसा भड़काने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने, तुलसी माला को लेकर टिप्पणी, केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय सेना से जुड़े विवादित बयान शामिल हैं।
बार-बार समन, फिर भी पेश नहीं हुईं सांसद
अदालती सूत्रों के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने महुआ मोइत्रा को कई बार नोटिस और समन भेजे थे, लेकिन वे हाजिर नहीं हुईं। इसके बाद अदालत ने 12 अगस्त को पेशी की तारीख तय की थी। उस दिन भी सांसद अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। इसके बाद 18 अगस्त को अदालत ने उन्हें एक और मौका देते हुए हाजिर होने का निर्देश दिया। उनकी ओर से वकील के जरिए पक्ष रखने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि किसी भी अर्जी पर विचार करने से पहले सांसद को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। बुधवार को भी महुआ मोइत्रा अदालत में उपस्थित नहीं हुईं और वकील के माध्यम से यह सूचना भिजवाई कि वे नहीं आ पाएंगी। इसके बाद अदालत ने संयम की सीमा पार होते देख उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दे दिया।
बंगाल सरकार के मंत्री ने साधा निशाना
वारंट जारी होने की खबर सामने आते ही राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोगों में अत्यधिक दंभ होता है और उन्हें यह अंदाज़ा नहीं होता कि कहां क्या बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस काम के पद मिल जाने पर अक्सर ऐसा ही होता है, और अदालत ने जो उचित समझा वही आदेश दिया है।
यह मामला उस पुराने ‘हेट स्पीच’ केस से अलग है
गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी वारंट उस मामले से अलग है, जिसमें कुछ हफ्ते पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने महुआ मोइत्रा को राहत दी थी। नादिया जिले के होगलबेड़िया थाने में दर्ज एक अलग एफआईआर में उन पर सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों के जरिए धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप है। उस मामले में 21 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सांसद को 5 अक्टूबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी, बशर्ते वे जांच में पूरा सहयोग करें और जांच अधिकारी के सामने पेश हों।
7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने भी महुआ मोइत्रा की उस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां झेलीं, तो राजनीति में रहते हुए अंडे फेंके जाने के डर से पीछे हटना ठीक नहीं है। इसके बाद उनके वकील ने याचिका वापस ले ली थी।
इसी क्रम में 14 अगस्त की रात को नादिया प्रशासन ने महुआ मोइत्रा को कृष्णनगर के सर्किट हाउस को देर रात खाली करने को कहा था, जिसके विरोध में उन्होंने 16 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास नियम 222 के तहत विशेषाधिकार नोटिस दाखिल किया था। उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट श्रीकांत पल्ली, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट निरपेंद्र सिंह और डिप्टी कलेक्टर अनामिका बेरा पर संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने का आरोप लगाया था।
आगे क्या?
अब गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद देखना यह है कि सांसद इस आदेश को अदालत में चुनौती देती हैं या फिर व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जमानत या राहत के लिए आवेदन करती हैं। महुआ मोइत्रा और तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक इस ताज़ा वारंट पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। भाजपा नेताओं ने इसे सांसद की “कानून से बचने की प्रवृत्ति” करार दिया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस पहले से ही इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब महुआ मोइत्रा पहले से ही कई कानूनी मोर्चों पर घिरी हुई हैं जिनमें कैश-फॉर-क्वेरी मामला, ईडी की जांच और अलग-अलग राज्यों में उनके बयानों को लेकर दर्ज कई एफआईआर शामिल हैं। यह खबर अपडेट हो रही है। नई जानकारी मिलने पर इसे और विस्तार से अपडेट किया जाएगा।

