Dharmendra Pradhan’s resignation: नई दिल्ली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। युवाओं के लगातार विरोध प्रदर्शन और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को लेकर उठी मांगों के बाद यह फैसला सामने आया है। रॉयटर्स समेत कई स्रोतों के अनुसार, प्रधान ने खुद पुष्टि की कि उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया है। यह विरोध मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चला। मई 2026 में NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद लाखों उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी थी। इससे नाराज छात्र, अभिभावक और युवा जून के मध्य से दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे हुए थे। उनकी मुख्य मांग थी—शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। कुछ रिपोर्टों में परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या की घटनाओं का भी जिक्र किया गया। विपक्षी दलों ने भी संसद में इस मुद्दे को उठाया और प्रधान के इस्तीफे की मांग की। युवा कांग्रेस समेत कई संगठनों ने अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किए।
सरकार ने पहले इस्तीफे की संभावना कम बताई थी और सुधारों पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का वादा भी किया था। फिर भी CJP ने साफ कहा था कि इस्तीफे के बिना कोई सार्थक बातचीत संभव नहीं। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों से हुई बैठक के बाद भी संगठन ने अपनी मांग दोहराई। शनिवार को जब इस्तीफे की खबर आई तो प्रदर्शनकारियों में खुशी का माहौल देखा गया।
जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से इंटरनेट बंद, मेट्रो स्टेशन बंद और पुलिस की सख्ती जारी थी। 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल भी हुआ था, जिसमें कई छात्र घायल हुए। इसके बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। सोशल मीडिया पर भी युवाओं ने #DharmendraPradhanResign और #CJP जैसे हैशटैग से अपनी आवाज बुलंद की। धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता हैं और लंबे समय से शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार किसे मिलेगा, यह साफ नहीं हुआ है। सरकार की ओर से आधिकारिक बयान अभी जारी किया जाना बाकी है।
यह घटना मोदी सरकार के लिए युवाओं के बढ़ते असंतोष का संकेत मानी जा रही है। बेरोजगारी, परीक्षा व्यवस्था की खामियां और जवाबदेही की मांग अब सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गई है। CJP जैसे संगठनों ने कहा है कि अब परीक्षा सुधार और छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर भी ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। देशभर में युवा संगठनों और विपक्ष ने इस इस्तीफे का स्वागत किया है। कई लोगों ने इसे छात्रों की जीत करार दिया। अब नजर इस बात पर है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में क्या बदलाव लाती है और नए शिक्षा मंत्री कौन बनते हैं।

