India Forex Reserves: मुंबई। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर बढ़कर 674.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 5.65 अरब डॉलर घटकर 666.93 अरब डॉलर रह गया था।
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आरबीआई के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) और स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में हुई वृद्धि रही।
केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षा सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 4.51 अरब डॉलर बढ़कर 545.578 अरब डॉलर हो गईं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें विभिन्न विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां शामिल रहती हैं।
इसी अवधि में भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य 2.67 अरब डॉलर बढ़कर 105.20 अरब डॉलर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में बदलाव का असर भी स्वर्ण भंडार के मूल्यांकन पर पड़ता है।
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आरबीआई के मुताबिक, विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights-SDR) भी 6.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.62 अरब डॉलर हो गए। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित कोष स्थिति (Reserve Position) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 1.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.79 अरब डॉलर हो गई।
गौरतलब है कि इस वर्ष 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के चलते इसमें कुछ गिरावट देखने को मिली थी। अब ताजा आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर मजबूती की ओर बढ़ रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इससे आयात भुगतान, विदेशी निवेशकों का भरोसा और रुपये की विनिमय दर को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है।
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