गुलशन इकेबाना सोसाइटी: लिफ्ट की खामियों से त्रस्त निवासी, थाने पहुंचकर मांगी एफआईआर उपशीर्षक: बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी की लापरवाही का आरोप, तकनीकी जांच व ऑडिट की मांग

बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी की लापरवाही का आरोप, तकनीकी जांच व ऑडिट की मांग

गुलशन इकेबाना सोसाइटी: नोएडा। सेक्टर-143 स्थित गुलशन इकेबाना सोसाइटी में लिफ्ट की खराब हालत को लेकर निवासियों का सब्र आखिरकार टूट गया। सोमवार को बड़ी संख्या में लोग सेक्टर-142 थाने पहुंचे और सोसाइटी प्रबंधन, मेंटेनेंस एजेंसी व बिल्डर के खिलाफ तहरीर देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद लिफ्टों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे हर रोज हादसे की आशंका बनी रहती है।

6 जुलाई की रात का डरावना अनुभव

मामले ने तब तूल पकड़ा जब 6 जुलाई की रात एक महिला सोसाइटी की लिफ्ट में फंस गई। निवासी पंकज अग्रवाल के मुताबिक लिफ्ट में अचानक तेज झटका लगा और वह कुछ देर तक अनियंत्रित ढंग से नीचे की ओर बढ़ने लगी, जिससे महिला बुरी तरह घबरा गई। सूचना मिलने के बावजूद मौके पर कोई प्रशिक्षित लिफ्ट ऑपरेटर नहीं पहुंच सका। आखिरकार सुरक्षा कर्मियों ने ही मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।

पुलिस से तकनीकी जांच और ऑडिट की मांग

थाने में दी गई शिकायत में निवासियों ने मांग की है कि सोसाइटी की सभी लिफ्टों की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही पिछले एक साल के मेंटेनेंस रिकॉर्ड, एएमसी (वार्षिक रखरखाव अनुबंध), सुरक्षा प्रमाणपत्रों और खर्च का पूरा ऑडिट कराने की मांग भी उठाई गई है। निवासियों ने लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि आगे से किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता।

हर महीने भारी मेंटेनेंस शुल्क, फिर भी सुविधाओं का अभाव

निवासी नवीन दूबे के अनुसार सोसाइटी में कुल 1438 फ्लैट हैं और हर फ्लैट से करीब पांच हजार रुपये मासिक मेंटेनेंस शुल्क वसूला जाता है। इसके अतिरिक्त क्लब सुविधा के नाम पर प्रति माह एक हजार रुपये अलग से लिए जाते हैं। इतनी बड़ी रकम वसूलने के बावजूद लिफ्टों की हालत बदहाल बनी हुई है, जिससे निवासियों में प्रबंधन के प्रति गहरा आक्रोश है।

पुरानी शिकायतें और अब भी अनसुलझी समस्याएं

यह सोसाइटी 2016 से आबाद है और नौ साल में लगभग पूरी तरह भर चुकी है, लेकिन बिल्डर ने अब तक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) का गठन नहीं होने दिया है, जबकि नियमानुसार इसका गठन पहले ही हो जाना चाहिए था। मेंटेनेंस का जिम्मा अभी भी बिल्डर के पास ही है, और पहले भी सोसाइटी में लिफ्ट खराबी और प्लास्टर गिरने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। निवासियों का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब लिफ्ट में कोई फंसा हो — इससे पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

निवासियों की एकजुट मांग

थाने पहुंचे निवासियों ने साफ कहा कि जब तक लिफ्टों का पूर्ण तकनीकी सुरक्षा ऑडिट नहीं होता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर हाईराइज सोसाइटियों में लिफ्ट सुरक्षा और बिल्डर-मेंटेनेंस एजेंसियों की जवाबदेही के सवाल को गंभीरता से खड़ा कर दिया है।

यह भी पढ़ें: ग्रेटर नोएडा: पंचशील ग्रीन में कार चालक महिला का एक्सीलेटर दबाने का हादसा, स्कूटी सवार महिला और बच्चे घायल

यहां से शेयर करें