उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी मेधा रूपम एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार कोई प्रशासनिक फैसला या आंदोलन नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत जुनून और बहुमुखी प्रतिभा की कहानी। सोशल मीडिया पर उन्होंने एयर पिस्टल थामे एक तस्वीर शेयर की है, जिसके साथ उन्होंने लिखा- “2006-07 में एयर राइफल से लेकर 2026 में एयर पिस्टल तक… जिंदगी का रोमांचक सफर जारी है।” यह पोस्ट न सिर्फ वायरल हो रही है, बल्कि लोगों को उनकी शूटिंग बैकग्राउंड और अनुशासित जीवनशैली की याद दिला रही है। मेधा रूपम यूपी कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और नोएडा की पहली महिला डीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। हाल ही में नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान सड़क पर उतरकर स्थिति संभालने की उनकी तस्वीरें चर्चा में रहीं थीं। अब उनकी शूटिंग वाली तस्वीर ने एक नया आयाम जोड़ दिया है।
स्कूल दिनों से शूटिंग का शौक
मेधा रूपम का जन्म 21 अक्टूबर को आगरा में हुआ। उनके पिता ज्ञानेश कुमार गुप्ता 1988 बैच के आईएएस अधिकारी और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। शुरुआती साल आगरा में गुजरे, लेकिन परिवार केरल चला गया, जहां उनकी स्कूलिंग हुई। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में हाथ आजमाया। 2008 में 12वीं कक्षा के साथ-साथ वे केरल राज्य की शूटिंग टीम का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उन्होंने केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते और 10 मीटर एयर राइफल कॉम्पिटिशन में राज्य का रिकॉर्ड भी तोड़ा। नेशनल स्तर तक पहुंची और अपनी मेहनत से नाम कमाया। बाद में उन्होंने पूरी तरह पढ़ाई पर फोकस किया, दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और UPSC में सफलता हासिल कर आईएएस बनीं।
प्रशासनिक सफर और उपलब्धियां
मेधा रूपम को गौतमबुद्ध नगर जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान सौंपी गई है। वे तेज-तर्रार और जमीनी स्तर पर काम करने वाली अधिकारी के रूप में जानी जाती हैं। हाल के महीनों में उन्होंने जिले की विभिन्न समस्याओं, परीक्षाओं की निगरानी और विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके इंस्टाग्राम (@medharoopam) पर भी शूटिंग के अलावा प्रशासनिक गतिविधियों की झलक मिलती है। उनकी यह तस्वीर युवाओं के लिए प्रेरणा का सबब बन रही है। इससे साबित होता है कि एक व्यक्ति कई क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल कर सकता है- चाहे शूटिंग हो, पढ़ाई हो या प्रशासन। मेधा रूपम का संदेश साफ है: जिंदगी को अपने तरीके से जियो और हर सफर का आनंद लो।
सोशल मीडिया पर चर्चा
पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स उनकी बहुमुखी प्रतिभा की तारीफ कर रहे हैं। कई लोग उन्हें “शूटर टर्न्ड आईएएस” कहकर याद कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि आईएएस अधिकारी सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके पास भी व्यक्तिगत जुनून और बचपन के सपने होते हैं जो कभी-कभी फिर से जाग जाते हैं। मेधा रूपम का यह सफर दिखाता है कि अनुशासन, मेहनत और निरंतरता से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिले में उनकी नेतृत्व क्षमता भविष्य में और कई उपलब्धियां हासिल करेगी, यही उम्मीद की जा रही है। जिंदगी की राह पर चलते हुए मेधा रूपम जैसे अधिकारी न सिर्फ प्रशासन को मजबूत बनाते हैं, बल्कि समाज को भी नई प्रेरणा देते हैं।

