Gen Alpha’s performance in Bhopal: भोपाल में पहली बार शैक्षणिक मुद्दे पर जेन अल्फा सड़क पर उतरा; DMS छात्रों ने KVS विलय को बताया तुगलकी फरमान, चरणबद्ध आंदोलन की दी चेतावनी।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार (18 अगस्त 2026) को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई तस्वीर देखने को मिली जब जेन अल्फा पीढ़ी के छात्र-छात्राएं पहली बार किसी शैक्षणिक संस्थान के मुद्दे पर सड़क पर उतरे। श्यामला हिल्स स्थित डेमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (डीएमएस), जिसे रीजनल स्कूल भी कहा जाता है, के करीब 300 से 400 विद्यार्थियों ने स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में विलय करने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। हाथों में ‘सेव डीएमएस’, ‘वी वांट जस्टिस’ जैसे पोस्टर और प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और स्कूल परिसर के बाहर जमावड़ा किया।
प्रदर्शन में जेन अल्फा के साथ कुछ जेन जेड छात्र भी शामिल हुए। अभिभावक भी उनके साथ खड़े नजर आए। छात्रों ने रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (आरआईई) के प्राचार्य प्रोफेसर एस.के. गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां और मांगें औपचारिक रूप से दर्ज कराईं। उन्होंने साफ कहा कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो वे चरणबद्ध तरीके से आंदोलन तेज करेंगे।
क्या है विलय का प्रस्ताव?
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के 7 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार, देश के चार पीएम श्री डेमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूलों—भोपाल, अजमेर, मैसूरु और भुवनेश्वर—को केंद्रीय विद्यालय संगठन को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। आदेश में इन चार स्कूलों के केवीएस को हस्तांतरण की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक समिति गठित की गई है, जो गठन के एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
ये चार स्कूल दिसंबर 1965 से एनसीईआरटी के अधीन चल रहे हैं। इन्हें शैक्षिक नवाचार और प्रयोगों की प्रयोगशाला के रूप में स्थापित किया गया था। इनमें नई शिक्षण विधियों का परीक्षण किया जाता था, जिन्हें बाद में देशभर के स्कूलों में अपनाया जाता था। भोपाल का डीएमएस नर्सरी से कक्षा 12 तक लगभग 1,000 छात्रों को शिक्षा देता है और व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी चलाता है।
छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं
छात्रों का कहना है कि केवीएस में विलय से स्कूल की अनूठी प्रायोगिक और प्रयोगात्मक पहचान हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। वे इसे ‘तुगलकी फरमान’ बता रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि विलय की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए, स्कूल की मौजूदा व्यवस्था बरकरार रखी जाए और इसे शैक्षिक नवाचार व अनुसंधान के केंद्र के रूप में और मजबूत किया जाए।
अभिभावकों ने भी चिंता जताई है। केंद्रीय विद्यालयों में प्राथमिकता आधारित प्रवेश प्रणाली होती है। उनका सवाल है कि मौजूदा छात्रों, शिक्षकों और आम परिवारों के बच्चों के भविष्य के प्रवेश पर इसका क्या असर पड़ेगा? व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का क्या होगा? स्कूल की मौजूदा अकादमिक संरचना कैसे प्रभावित होगी? इन सवालों पर अभी तक स्पष्टता नहीं मिली है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे राजधानी में प्रदेश का पहला ‘जेन अल्फा प्रोटेस्ट’ करार दिया।
आगे की राह
छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने और संबंधित विभागों तक अपनी बात पहुंचाने का संकल्प दोहराया है। प्राचार्य प्रो. एस.के. गुप्ता से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया लेने के प्रयास किए गए, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में स्कूली बच्चों द्वारा उठाई गई आवाजों की कड़ी में आता है, जहां विद्यार्थी सीधे प्रशासन से संवाद कर रहे हैं। भोपाल के इस जेन अल्फा प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नई पीढ़ी अपनी शिक्षा व्यवस्था की रक्षा के लिए सजग और मुखर है। अब देखना यह है कि एनसीईआरटी और केंद्र सरकार इस विरोध को कितनी गंभीरता से लेती है और स्कूल की प्रायोगिक विरासत को बचाने के लिए क्या कदम उठाती है।

