ई20 पेट्रोल के खिलाफ दिल्ली में पहला बड़ा प्रदर्शन, मोटरिस्टों का दावा, माइलेज घटा, ईंधन सिस्टम बिगड़ा

ई20 (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के अनिवार्य क्रियान्वयन के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को सैकड़ों मोटरिस्टों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि इस ईंधन से उनकी गाड़ियों का माइलेज काफी घट गया है, ईंधन सिस्टम चोक हो रहा है, इंजन में समस्या आ रही है और महंगे रिपेयर का खर्च बढ़ गया है। यह नीति अप्रैल 2026 से देशभर में लागू हो गई है।

टीम भारत अगेंस्ट एथनॉल स्कैम के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस समर्थक और सोशल एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने किया। उन्होंने मांग की कि लोगों को E0, E5 या E10 जैसे कम ब्लेंड वाले विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, क्योंकि ज्यादातर पुरानी गाड़ियां (खासकर 2023 से पहले की) E20 के अनुकूल नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया पर वायरल अपनी शिकायतों को सड़क पर उतारा और सरकार से पारदर्शी अध्ययन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल एक मोटरिस्ट ने बताया, “दो महीने में ही कार का फ्यूल सिस्टम चोक हो गया, इंजन स्टॉल हो रहा है और माइलेज 15-20% तक गिर गया है।” कई अन्यों ने फिल्टर ब्लॉकेज, रफ आइडलिंग, स्टार्टिंग प्रॉब्लम और महंगे सर्विसिंग खर्च की शिकायत की। खासकर पुरानी कारों और स्कूटर्स वाले मालिकों में आक्रोश ज्यादा है।

सरकार और विशेषज्ञों का पक्ष

सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि E20 सुरक्षित है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य अधिकारियों ने स्वीकार किया कि माइलेज में 3-5% की मामूली गिरावट हो सकती है, क्योंकि एथनॉल की ऊर्जा सामग्री पेट्रोल से कम होती है, लेकिन यह इंजन परफॉर्मेंस में सुधार और कम नॉकिंग लाती है। ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के टेस्ट्स में 40,000 किमी तक की दूरी पर कोई बड़ा नुकसान नहीं पाया गया। सरकार का दावा है कि E20 से क्रूड ऑयल आयात में बचत हुई है (2014 से अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये), किसानों की आय बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है। ऑटोमेकर्स जैसे मारुति सुजुकी और SIAM ने भी कहा कि E10 कंपैटिबल गाड़ियों में कोई बड़ा डैमेज नहीं होता, हालांकि पुरानी गाड़ियों में थोड़ी समस्या संभव है।

विवाद के कारण

माइलेज ड्रॉप: उपयोगकर्ता 10% या उससे ज्यादा की गिरावट रिपोर्ट कर रहे हैं, जबकि अध्ययन 2-6% बताते हैं। 

पुरानी गाड़ियां: 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां पूरी तरह E20 कंपैटिबल नहीं हैं। एथनॉल नमी आकर्षित करता है, जिससे जंग या क्लॉगिंग हो सकती है।

विकल्प की मांग: अनिवार्य ब्लेंडिंग के बजाय चुनाव की मांग।

सोशल मीडिया: वायरल वीडियो और पोस्ट्स ने मुद्दे को बढ़ावा दिया।

सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला पहुंचा है, जहां सरकार ने कहा कि ट्रायल्स 2027 तक चलेंगे।

विश्लेषण: E20 नीति ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए महत्वाकांक्षी है, लेकिन क्रियान्वयन में पुरानी वाहन फ्लीट (भारत में बड़ा हिस्सा) को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि नियमित सर्विसिंग, फ्यूल फिल्टर चेक और जरूरत पड़ने पर रेट्रोफिटिंग से समस्याएं कम की जा सकती हैं। प्रदर्शनकारी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन देशव्यापी हो सकता है। यह मुद्दा मध्यम वर्ग के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है, जहां ईंधन खर्च पहले ही काफी है।

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