ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति चौक पर अंडरपास निर्माण का धूल भरा तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा। दिन चाहे रात के अंधेरे में भी धूल की मोटी चादर सड़कों को कोहरे में लपेट रही है, जिससे आसपास की सोसाइटियों में रहने वाले बच्चे और बुजुर्ग सांस लेने को तड़प रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दादरी विधायक तेजपाल नागर और सांसद महेश शर्मा सहित प्रशासन इस स्वास्थ्य आपदा पर पूरी तरह मौन साधे हुए है।
चार मूर्ति चौक का यह भयावह दृश्य स्थानीय निवासियों के दिलों कैद हो गया है, जो दिन चाहे रात के समय भारी धूल भरी आंधी और ट्रैफिक की अव्यवस्था के कारण उनका जीवन जीना दुर्भर हो गया है। अब कभी भी अपने घर से बाहर निकलेंगे चार पर सामने का नजारा धूल के कारण पूरी तरह धुंधला दिखाई देगा। स्ट्रीट लाइटें और विज्ञापन हॉर्डिंग्स की रोशनी धूल कणों से बिखर रही है।एक काली एसयूवी चौराहा पार करने की जद्दोजहद में है, जबकि पीछे से आने वाली हेडलाइट्स केवल चमकते गोले नजर आ रही हैं। दृश्यता इतनी कम है कि वाहन चालकों के लिए रास्ता देखना भी चुनौती बन गया है।
यह कड़वा विडंबना है कि जहां बच्चों के भविष्य की बात हो रही है, वहीं चार चौक पर वे जहरीली धूल में सांस लेने को मजबूर हैं। पार्श्वभूमि में स्थानीय रेस्टोरेंट्स, दुकानें और स्कूटर सवार लोग धूल के गुबार से जूझते नजर आते हैं। सड़क किनारे पैदल यात्री भी इस प्रदूषण की चपेट में हैं। स्थानीय निवासी रवि शर्मा ने बताया, “यहां PM 2.5 और PM 10 का स्तर खतरनाक सीमा से कहीं ऊपर है। बच्चे-अस्पताल पहुंच रहे हैं, बुजुर्गों को सांस की तकलीफ हो रही है। निर्माण एजेंसी पानी का छिड़काव या ग्रीन नेटिंग तक नहीं लगा रही।” एक अन्य निवासी ने कहा, “ट्रैफिक जाम और धूल से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।”
नोएडा अथॉरिटी के एक अधिकारी ने बताया कि अंडरपास का काम NHAI को सौंपा गया है, जो जून तक पूरा होने का लक्ष्य रखे हुए है। हालांकि, धूल नियंत्रण के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन जमीन पर अमल नजर नहीं आ रहा। CPCB के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में AQI 300 से ऊपर पहुंच गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है। दादरी विधायक कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जबकि सांसद महेश शर्मा के प्रतिनिधि ने कहा, “मामले की जानकारी ली जा रही है।” निवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल पानी छिड़काव, कवरिंग और ट्रैफिक डायवर्जन न हुआ, तो आंदोलन छेड़ देंगे। यह स्वास्थ्य आपदा अब चुनावी मुद्दा बनने को तैयार है।

