New Delhi news इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती एवं दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रौद्योगिकी संकाय की ओर से सोमवार को वाइसरीगल लॉज स्थित कन्वेंशन हॉल में ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीडियो संदेश के माध्यम से आयोजन के लिए इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती और दिल्ली विश्वविद्यालय को बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी विज्ञान मंथन ब्रोशर का भी विमोचन किया गया।
कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि देश ने 800 वर्षों की गुलामी, अपमान और अधीनता को सहा है, जिसका एक बड़ा कारण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछड़ना रहा। उन्होंने कहा कि उस इतिहास को भूलना नहीं चाहिए, तभी देश के विकास को सही दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस हमें प्रेरणा देता है कि तकनीक और प्रौद्योगिकी के मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। यदि हम स्वयं तकनीक विकसित कर सकते हैं तो करें, यदि नहीं कर सकते तो उसे खरीदें और यदि वह भी संभव न हो तो तकनीकी साझेदारी के माध्यम से आगे बढ़ें। नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबर्धन दास ने कहा कि जॉन डाल्टन से लगभग 2500 वर्ष पहले महर्षि कणाद ने परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। उन्होंने कहा कि लंबे गुलामी काल के दौरान भारत की वैज्ञानिक प्रगति प्रभावित हुई और ज्ञान के बड़े केंद्र नष्ट कर दिए गए।इस अवसर पर दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. पायल मागो, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, एफओटी के डीन प्रो. संजीव सिंह सहित कई डीन, निदेशक, अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी क्षमता का परिचय दिया
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी क्षमता का परिचय देते हुए न केवल देश बल्कि अन्य देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। आज दुनिया में सबसे अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन भारत में हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में भारत ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पाई ने कहा कि जब तक भारतीय भाषाओं में विज्ञान का प्रसार नहीं होगा, तब तक वह देश के 140 करोड़ लोगों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान भारती इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
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