अभिनेता से मुख्यमंत्री बने थलापति विजय, वंदे मातरम् विवाद और स्टालिन से सौहार्दपूर्ण मुलाकात

तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना आज का दिन। फिल्म अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) ने तमिलागा वेट्ट्री कझगम (TVK) के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में भव्य समारोह में हुए शपथ ग्रहण में राष्ट्रीय गान से पहले पूरे छह छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ गाया गया, जिसने तुरंत विवाद खड़ा कर दिया। वहीं, शपथ के एक दिन बाद विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मुलाकात कर सौहार्द का संदेश दिया।

समारोह में राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। विजय ने काले पैंटसूट में शपथ ली और अपने पहले संबोधन में पारदर्शिता, महिलाओं की सुरक्षा, नशीले पदार्थों पर अंकुश और तत्काल कल्याणकारी योजनाओं जैसे फ्री पावर यूनिट्स का वादा किया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने राज्य को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ा है, जिस पर स्टालिन ने तीखा पलटवार किया और कहा कि राज्य का कर्ज सीमा के अंदर है।

वंदे मातरम् विवाद: तमिल गान को तीसरा स्थान

शपथ समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और अंत में तमिल राज्य गान ‘तमिझथाई वाझथु’ बजाया गया। इस क्रम ने परंपरा भंग करने का आरोप लगाते हुए DMK, CPI समेत सहयोगी दलों में नाराजगी पैदा कर दी। विपक्ष ने इसे राज्य का अपमान बताया, जबकि TVK ने केंद्र के नए गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश का हवाला दिया। विवाद के बाद TVK को स्पष्टीकरण देना पड़ा कि भविष्य में राज्य गान को प्राथमिकता दी जाएगी। यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई, खासकर इसलिए क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी मौजूद थे, जबकि कांग्रेस पहले ऐसी पहल का विरोध करती रही है।

स्टालिन से मुलाकात: शिष्टाचार भेंट

शपथ ग्रहण के अगले दिन सोमवार को मुख्यमंत्री विजय अलवरपेट स्थित स्टालिन के आवास पहुंचे। उदयनिधि स्टालिन ने द्वार पर स्वागत किया और दोनों नेताओं में गले मिलने का गर्मजोशी भरा माहौल रहा। यह बैठक शिष्टाचार की मुलाकात बताई गई, जिसमें सत्ता हस्तांतरण पर चर्चा हुई। चुनावी लड़ाई के बावजूद यह मुलाकात तमिलनाडु की राजनीति में सभ्यता और परिपक्वता का उदाहरण मानी जा रही है। TVK ने अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतीं और कांग्रेस व अन्य छोटे दलों के समर्थन से बहुमत हासिल किया, जिससे DMK-AIADMK के लंबे वर्चस्व का अंत हुआ।

आगे की चुनौतियां

नए मुख्यमंत्री विजय पर अब राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने, कल्याणकारी योजनाएं लागू करने और क्षेत्रीय-राष्ट्रीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी है। वंदे मातरम् विवाद ने सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को रेखांकित किया है, जबकि स्टालिन से मुलाकात ने विपक्षी मोर्चे में सकारात्मक संकेत दिए हैं। तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ‘फ्री के चक्कर’ (मुफ्त योजनाओं) से परे विजय का कार्यकाल कैसा रहेगा—यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, स्टार पावर से राजनीति तक का सफर तय करने वाले थलापति विजय का कार्यकाल विकास, पारदर्शिता और सांस्कृतिक संतुलन के वादों के साथ शुरू हुआ है।

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