हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी भारी पड़ी, गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम के खिलाफ जमानती वारंट जारी

दो बार आदेश देने के बावजूद नहीं दाखिल हुआ हलफनामा, आज सुबह 10 बजे कोर्ट में पेश होने का निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेशों की लगातार अनदेखी करना गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन को भारी पड़ गया है। अदालत के प्रति इस ढुलमुल रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी मेधा रूपम के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है। जिलाधिकारी को 2 जुलाई की सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला महेंद्र दत्त शर्मा बनाम राज्य और अन्य याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ इस याचिका की सुनवाई कर रही है। इस मामले में हाई कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करने के लिए दो बार स्पष्ट आदेश दिए थे पहला 8 दिसंबर 2025 को और दूसरा 5 जनवरी 2026 को। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद डीएम कार्यालय की ओर से न तो कोई जवाब दाखिल किया गया और न ही प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में कोई गंभीरता दिखाई गई।

अदालत की तल्ख टिप्पणी

1 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शमशेरी की अदालत ने प्रशासनिक लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में कहा कि न्यायालय के आदेशों की इस तरह की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि जिलाधिकारी जैसे जिम्मेदार और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी से इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना रवैये की उम्मीद नहीं की जाती। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि अधिकारियों का ऐसा टालमटोल भरा रवैया न्यायिक प्रक्रिया में बेवजह अड़चन पैदा करता है।

जमानती वारंट और तलबी का आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के माध्यम से जिलाधिकारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। डीएम को 2 जुलाई 2026 की सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना होगा। कोर्ट में उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि बार-बार समय दिए जाने के बावजूद हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया गया और उनके खिलाफ अदालत की अवमानना के तहत दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को भी इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी कानूनी कदम तुरंत उठाने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन में हड़कंप, अगली सुनवाई पर नजरें

हाई कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अधिकारी अब हलफनामा तैयार करने और अदालत के सामने अपना पक्ष रखने की कवायद में जुट गए हैं। जिले भर में इस मामले की चर्चा तेज है और सबकी निगाहें अब आज होने वाली सुनवाई और उसमें जिलाधिकारी की पेशी पर टिकी हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि अदालतें अब प्रशासनिक शिथिलता और आदेशों की अनुपालना में देरी को लेकर सख्ती से पेश आ रही हैं।

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