Dimagi Naxal’: नई दिल्ली/दिल्ली। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प दोहराया और चेतावनी दी कि सशस्त्र नक्सल तो लगभग समाप्त हो चुके हैं, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ (बौद्धिक या वैचारिक नक्सली) अभी भी मौके तलाश रहे हैं। उन्हें पहचानकर अलग-थलग करना होगा ताकि युवा विकसित भारत के मुख्यधारा में जुड़ सकें।
इस बयान के महज दो-तीन दिन बाद ही देशभर के छात्र और अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। विशेषकर यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा की विसंगतियों और कथित पेपर लीक के आरोपों को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और प्लेकार्ड पर ‘दिमागी नक्सल’ लिखकर व्यंग्य किया। कुछ जगहों पर ‘मॉडी लीक्स’ जैसे नारे भी लगे। Instagram पर ‘Dimagi Naxal Party’ नाम का एक व्यंग्यात्मक पेज भी तेजी से वायरल हुआ, जिसने 24-48 घंटों में डेढ़ लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए।
एक छात्र कार्यकर्ता ने Instagram लाइव में भावुक होकर कहा, “आप टाइम पर Instagram पे लाइव आके हमें फ्रेंड्स कह रहे हो और फिर कह रहे हो कि हेलो फ्रेंड्स एंड स्टफ… और फिर आप हम ही को दिमागी नक्सल कह रहे हो। ये गवर्नमेंट बहुत हद तक हम स्टूडेंट्स के लिए कुछ कर नहीं रही। पेपर्स लीक हो रहे हैं। अभी कल ही यूजीसी नेट का रिजल्ट आया, उसमें तीन पेपर थे जो वापस से हो रहे हैं और एक महीने बाद आप रिजल्ट दे रहे हो। रिजल्ट क्या, आंसर की आया है बस। अभी उसके अलावा बाकी एग्जाम्स भी लीक हो रहे हैं।”
उन्होंने लोकतंत्र के मूल सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा, “द मोस्ट फंडामेंटल प्रिंसिपल ऑफ डेमोक्रेसी इज आस्किंग फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड रिस्पांसिबिलिटी। सबसे बेसिक फीचर है और अगर वो कोई भी स्टूडेंट, कोई भी बच्चा कर रहा है तो आई डोंट नो ऑन व्हाट क्राइटेरिया दे आर एकनॉलेजिंग देम एस अर्बन नक्सल। आई डोंट नो उनका खुद का क्राइटेरिया क्या है बिकॉज आई थिंक एज अ सिटीजन ऑफ इंडिया वी शुड बी लॉयल टू आवर कंट्री, नॉट टू आवर गवर्नमेंट।”
छात्र ने आगे कहा कि बार-बार ‘कॉकरोच’ या ‘दिमागी नक्सल’ जैसे लेबल लगाकर युवाओं को वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा रहा है और उन्हें बांटा जा रहा है। “लाल किले की प्राचीर से आजादी के 80 वर्ष बाद भी अगर आप दिमागी नक्सल और इस तरीके के मुद्दों पर बात कर रहे हैं… मैं चाहता था कि मोदी जी वहां से ऐलान करें कि देश में कितने करोड़ रोजगार आपने दे दिए, कितने नए-नए स्कूल बना दिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सिस्टम को करप्ट करने वाले, जनता के साथ धोखा करने वाले और पहले अपना हित सोचने वाले ही असली समस्या हैं। आलोचना का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अभिव्यक्ति का तरीका कभी-कभी आक्रामक हो जाता है।
यूजीसी नेट विवाद: क्या हुआ था?
जून 2026 में आयोजित यूजीसी नेट परीक्षा में अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र (Sociology) के प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां पाई गईं। इनमें तथ्यात्मक गलतियां, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी त्रुटियां, विद्वानों के नाम गलत लिखना, पुराने प्रश्नों की दोहराई और व्याकरण की गलतियां शामिल थीं। NTA की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर 17 अगस्त को घोषणा हुई कि ये तीन पेपर 9 और 10 सितंबर को दोबारा कराए जाएंगे। इससे हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
समाजशास्त्र पेपर को लेकर जुलाई में ही पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे थे। हरियाणा के छात्र नेताओं ने दावा किया था कि परीक्षा से पहले लगभग 100 पन्नों की पीडीएफ वायरल हुई जिसमें 90 के करीब सवाल असली पेपर से मेल खाते थे। कुछ अभ्यर्थियों को रात को कोचिंग में 2.25 लाख रुपये लेकर सवाल पढ़ाए जाने का आरोप भी लगा। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने सरकार और NTA पर सवाल उठाए। NTA ने आधिकारिक रूप से लीक स्वीकार नहीं किया, लेकिन त्रुटियों के आधार पर दोबारा परीक्षा का फैसला लिया। जेएनयू के एक छात्र डेविड ने न्यूज18 से बात करते हुए कहा कि परीक्षा के चार-पांच दिन बाद ही लीक की खबरें आ गई थीं, लेकिन NTA को एक महीने से ज्यादा लग गया नोटिस जारी करने में। आंसर की भी नहीं आई।
प्रदर्शन और मांगें
17 अगस्त को दिल्ली के ओखला स्थित NTA दफ्तर के बाहर NSUI, AISA, SFI समेत कई छात्र संगठनों ने धरना दिया। छात्रों ने NTA को ‘डिफॉर्म्ड बॉडी’ बताया और कहा कि लगातार दर्जनों पेपर लीक हो चुके हैं। मांगें साफ हैं—NTA को भंग किया जाए, अध्यक्ष इस्तीफा दें, प्रभावित छात्रों की फीस वापस हो, रि-एग्जाम जल्दबाजी में न हो और केंद्र चुनने की सुविधा मिले। पुलिस के साथ हल्की झड़प भी हुई।
ABP न्यूज के सैदीप चौधरी के शो में भी ‘दिमागी नक्सल’ और शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहाल स्थिति पर चर्चा हुई। छात्रों का आरोप है कि NEET पेपर लीक के बाद भी सिस्टम में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। सरकार और NTA का पक्ष यह है कि ज्यादातर परीक्षाएं बिना गड़बड़ी के संपन्न होती हैं। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार NTA ने कुल 184 टेस्ट कराए जिनमें 181 बिना समस्या के हुए। त्रुटियां पाए जाने पर तुरंत रि-टेस्ट का फैसला लिया गया। NTA में ओवरहॉल भी शुरू हुआ है, जिसमें 50 से ज्यादा स्टाफ हटाए गए हैं।
युवाओं का संदेश
छात्रों का कहना है कि देशभक्ति का मतलब सरकार की हर नीति का समर्थन नहीं है। लोकतंत्र में जवाबदेही मांगना और सिस्टम की कमियों पर सवाल उठाना नागरिक कर्तव्य है। पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय लेबल लगाकर उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश गलत है। लाल किले से रोजगार, स्कूल और शिक्षा व्यवस्था सुधार के ऐलान की अपेक्षा रखने वाले ये युवा अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी आवाज उठा रहे हैं। विवाद अभी थमा नहीं है। 9-10 सितंबर की दोबारा परीक्षा और NTA के भविष्य पर नजरें टिकी हुई हैं।

