नोएडा। शहर में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने एक बड़ी पहल की तैयारी की है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर करीब 45 किलोमीटर लंबी हरित पट्टिका में बांस के पौधे लगाए जाएंगे। प्राधिकरण के अनुसार इस पहल से हजारों लोगों के लिए लंबे समय तक ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने में भी फायदा होने की उम्मीद है।
45 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट में होगा बांस का पौधरोपण
नोएडा प्राधिकरण के उद्यान निदेशक आनंद मोहन सिंह के अनुसार एक्सप्रेसवे के किनारे सर्विस रोड और नाले के बीच खाली पड़ी करीब दो मीटर चौड़ी हरित पट्टिका में बांस के पौधे लगाए जाएंगे।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ करीब 22.5-22.5 किलोमीटर क्षेत्र में यह हरित पट्टी मौजूद है। प्राधिकरण की लगभग 45 किलोमीटर लंबी इस पट्टी में करीब तीन मीटर की दूरी पर एक बांस का पौधा लगाने की योजना है।
10 हजार वयस्कों के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का दावा
एक सामान्य वयस्क प्रतिदिन औसतन करीब 550 लीटर ऑक्सीजन का उपयोग करता है। इस हिसाब से एक वर्ष में करीब दो लाख लीटर यानी लगभग 200 घन मीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
प्राधिकरण की योजना के मुताबिक एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित की जाने वाली हरियाली करीब 10 हजार वयस्कों के लिए 120 वर्षों तक ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में योगदान दे सकती है। हालांकि वास्तविक ऑक्सीजन उत्पादन कई पर्यावरणीय और जैविक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
बांस से पर्यावरण को कई फायदे मिलने की उम्मीद
प्राधिकरण का मानना है कि बांस के पौधों से केवल हरियाली ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। बांस की हरित पट्टी वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, मिट्टी और भूजल संरक्षण में योगदान देने के साथ एक्सप्रेसवे के आसपास हरित अवरोध तैयार करने में मदद कर सकती है।
इसके अलावा एक्सप्रेसवे के किनारे हरित पट्टी विकसित होने से सड़क पर वाहनों की आवाजाही के दौरान दृश्यता और सड़क सुरक्षा से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
शहर को हराभरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम
नोएडा में लगातार बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या के बीच हरित क्षेत्र को बढ़ाना प्राधिकरण के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में एक्सप्रेसवे के किनारे खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल हरित पट्टी के रूप में करने की योजना को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण का लक्ष्य इस पहल के जरिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे को और अधिक हरा-भरा बनाने के साथ शहर के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है।

