गौतमबुद्ध नगर (नोएडा/दादरी)। दादरी तहसील क्षेत्र में सरकारी व निजी जमीन के कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। स्थानीय अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट्स और पीड़ितों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, पटवारी राकेश नागर पर भू-माफिया से मिलीभगत का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी पैमाइश रिपोर्ट देकर खसरा संख्या 47 की 0.4810 हेक्टेयर एलएंडएम (लेखा एवं नक्शा) जमीन को अवैध रूप से कब्जे में दिलाने में भूमिका निभाई।
स्थानीय समाचार पत्रों में छपी खबर के मुताबिक, ग्राम गुमराह के निवासी नागेंद्र पुत्र प्रताप ने आरोप लगाया कि 30 नवंबर को तहसीलदार ने पटवारी राकेश नागर को पुलिस बल के साथ जाकर खसरा संख्या 47 की जमीन की पैमाइश करने के निर्देश दिए थे। यह जमीन एलएमसी (लैंड मैनेजमेंट कमेटी/सरकारी) की बताई गई। लेकिन पटवारी ने अवैध कब्जेदारों को वहां निर्माण कर लेने तथा अपनी करीबियों को अवैध कब्जा दिलाने में मदद की। फर्जी खानापूर्ति कर गलत रिपोर्ट अपने अधिकारियों को प्रेषित कर दी, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा। आरोपी रवि प्रधान का रिश्तेदार होने का भी जिक्र है और राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाया गया है।
रवि प्रधान ने खसरा संख्या 42 तथा 45 में करोड़ों रुपये की जमीन पर प्राधिकरण की ओर से निर्माण कर लिया। दोनों खसरों में स्थित अपनी जमीन का बैनामा करके कब्जा प्राधिकरण की जमीन पर करवा दिया। इससे नोएडा प्राधिकरण को भी करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। बावजूद इसके किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही। आरोप है कि अपनी राजनीतिक पहुंच तथा पैसे के बल पर वे प्राधिकरण तथा दादरी तहसील के कुछ कर्मचारियों से अपने पक्ष में रिपोर्ट बनवा देते हैं।
इसी मुद्दे पर नोएडा मीडिया क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिटायर्ड फौजी राजेंद्र कुमार (राजेंद्र कुमार फौजी) ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि कुछ लोगों ने अपनी वास्तविक हिस्सेदारी से कहीं ज्यादा जमीन बेच दी है। मूल जमीन करीब 552 बैच/बीघा के आसपास बताई गई, जबकि आरोपी पक्ष ने कहीं अधिक रजिस्ट्रियां करा दी हैं। उन्होंने खतौनी, रजिस्ट्रियां और पटवारी राकेश नागर की रिपोर्ट को सबूत के रूप में पेश किया। कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इसके बावजूद आसपास की जमीन बेची जा रही है।
एक अन्य पीड़ित नागेंद्र खारी ने खसरा नंबरों (122, 18 आदि) का जिक्र करते हुए बताया कि ढाई-ढाई बीघा जमीन अलग-अलग पक्षों की है, कुछ जमीन बिक चुकी है और जबरन वापस लौटना पड़ता है।गौतमबुद्ध नगर nsez पुलिस चौकी क्षेत्रत्रांगत शिकायत के बाद जिलाधिकारी और नोएडा प्राधिकरण अधिकारी तक नहीं आए पुलिस, एसीपी व डीएसपी स्तर पर शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्राधिकरण की तरफ से भी कुछ कार्रवाई का जिक्र किया गया लेकिन संतोषजनक परिणाम नहीं मिले। जान का खतरा महसूस करने की बात भी कही गई।
दस्तावेजों से सामने आई तस्वीर
पीड़ितों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में नोएडा/दादरी क्षेत्र के बिक्री विलेख शामिल हैं। इनमें ग्राम नया गांव मजरा इल्हाबंस, परगना व तहसील दादरी, जिला गौतमबुद्ध नगर स्थित खसरा संख्या 99 की 112.66 वर्ग गज (94.197 वर्ग मीटर) आवासीय खाली प्लॉट की बिक्री का उल्लेख है। विक्रेता एकता सिंह (पत्नी संजीव कुमार सिंह) तथा क्रेता रविंदर कुमार सिंह आदि के नाम दर्ज हैं। 16 मई 2005 की एक रजिस्ट्री में 1,70,000 रुपये का लेन-देन बताया गया है। प्लॉट मैप में नागेंद्र, मुकेश, आदि नामों के प्लॉट दिखाई देते हैं। हाल के ई-स्टैंप सर्टिफिकेट (सितंबर 2026) भी पेश किए गए। इन दस्तावेजों और स्थानीय अखबारों की रिपोर्ट्स से साफ है कि मामला दादरी तहसील की एलएंडएम/सरकारी जमीन, फर्जी पैमाइश, अतिरिक्त रजिस्ट्रियां और राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा है।
ताजा स्थिति
मामला स्थानीय स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और अखबारों में चर्चा में है। बड़े राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत स्वतंत्र जांच रिपोर्ट फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उत्तर प्रदेश में भूमि विवाद, राजस्व कर्मचारियों की भूमिका और प्राधिकरण जमीन पर कब्जे के कई मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में तहसील, एसडीएम, पुलिस और कभी-कभी उच्च न्यायालय का रुख किया जाता है।
आगे की संभावित कार्रवाई
संबंधित थाना/तहसील में शिकायत दर्ज कर दस्तावेजों की जांच। पटवारी राकेश नागर तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच। नोएडा प्राधिकरण द्वारा खसरा 42, 45 व 47 की जमीन की स्थिति स्पष्ट करना।
कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन सुनिश्चित करना। पीड़ितों द्वारा संयुक्त याचिका या उच्च स्तर पर शिकायत। यह रिपोर्ट वीडियो बयानों, पेश किए गए दस्तावेजों (रजिस्ट्रियां, खतौनी, प्लॉट मैप, ई-स्टैंप) तथा स्थानीय अखबार क्लिपिंग्स पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकती है। प्रशासन, पुलिस और प्राधिकरण से जवाब तथा आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

