New Delhi news बाहरी उत्तरी जिला पुलिस ने जुलाई माह को ‘बाल सुरक्षा माह’ के रूप में मनाते हुए बच्चों की सुरक्षा, जागरूकता और संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल की। पूरे महीने चले विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 52 लापता बच्चों (13 लड़के और 39 लड़कियां) को सकुशल तलाश कर उनके परिजनों से मिलाया। यह अभियान संयुक्त पुलिस आयुक्त (नॉर्दर्न रेंज) विजय कुमार के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-प्रथम अमित कौशिक और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-द्वितीय प्रक्ष्य कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चलाया गया।
जिले के सभी थाना प्रभारियों और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने तकनीकी निगरानी, स्थानीय सूचनाओं और लगातार अभियान के माध्यम से लापता बच्चों की तलाश की। पुलिस ने बताया कि हर गुमशुदा बच्चे की शिकायत को अत्यंत संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप सभी 52 बच्चों को सुरक्षित बरामद कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके परिवारों के सुपुर्द किया गया।
*27 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचा सुरक्षा अभियान*
जिले की परिवर्तन सेल ने जुलाई भर 54 सरकारी एवं निजी विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में 27 हजार से अधिक विद्यार्थियों को आत्मरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, बाल अधिकार, व्यक्तिगत सुरक्षा, जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार और बाल शोषण की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को न केवल जागरूक बनाना, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी और सुरक्षित बनाना भी था।
*मेगा सेमिनार में दिया सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश*
13 जुलाई को रोहिणी स्थित शहीद सुखदेव कॉलेज आॅफ बिजनेस स्टडीज में आयोजित मेगा चाइल्ड प्रोटेक्शन सेमिनार इस अभियान का मुख्य आकर्षण रहा। इसमें करीब 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 150 से अधिक सरकारी एवं निजी स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि, शिक्षा विशेषज्ञ और छात्र शामिल थे। सेमिनार में बाल संरक्षण, बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा, स्कूलों की भूमिका, पुलिस-स्कूल-एनजीओ समन्वय और कानूनी सुरक्षा उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
*’आॅपरेशन नाजुक’ से झुग्गी बस्तियों तक पहुंची पुलिस*
अभियान के तहत ‘आॅपरेशन नाजुक’ भी चलाया गया, जिसके माध्यम से झुग्गी-बस्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को गुड टच-बैड टच, असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान, बाल शोषण से बचाव तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन से मदद लेने के बारे में जागरूक किया गया।
बाहरी उत्तरी जिला पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि कोई बच्चा लापता हो जाए तो बिना देर किए पुलिस को सूचना दें। समय पर दी गई जानकारी बच्चे की शीघ्र और सुरक्षित बरामदगी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


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