LIC shares at low levels: LIC के शेयरों में भारी गिरावट, सस्ते दाम पर सरकार की 6.5% हिस्सेदारी बिक्री से निवेशक सहमे, स्टॉक 4 महीने के निचले स्तर पर

LIC shares at low levels: नई दिल्ली/मुंबई। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयरों में मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। सरकार द्वारा कंपनी में 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लॉन्च किए जाने के बाद LIC का शेयर करीब चार महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान स्टॉक में लगभग 8.87 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

क्या है पूरा मामला

वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने राष्ट्रपति की ओर से LIC में हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। यह बिक्री दो चरणों में होगी:

बेस साइज: कुल इक्विटी पूंजी का 2.50 प्रतिशत यानी करीब 31.62 करोड़ शेयर

ग्रीनशू विकल्प: ज़्यादा मांग आने पर अतिरिक्त 4 प्रतिशत यानी करीब 50.60 करोड़ शेयर बेचने का विकल्प

कुल पेशकश: अधिकतम 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी लगभग 82.22 करोड़ शेयर

इस पूरे इश्यू का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो सोमवार के बंद भाव के मुकाबले करीब 10 से 11 प्रतिशत सस्ता है। खुदरा निवेशकों और कंपनी के पात्र कर्मचारियों को कट-ऑफ प्राइस पर 10 रुपये प्रति शेयर की अतिरिक्त छूट भी दी जा रही है।

दो दिन में पूरा होगा इश्यू

यह ऑफर फॉर सेल दो कारोबारी दिनों में पूरा किया जाएगा:

1. 4 अगस्त 2026 (T Day): सिर्फ गैर-खुदरा यानी संस्थागत और कॉरपोरेट निवेशकों के लिए बोली की शुरुआत हुई।

2. 5 अगस्त 2026 (T+1 Day): खुदरा निवेशकों और पात्र कर्मचारियों के लिए बोली खुलेगी। जिन गैर-खुदरा निवेशकों की बोली अलॉट नहीं हो पाई, वे भी इस दिन हिस्सा ले सकेंगे।

पेशकश किए गए शेयरों में से 10 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 8.22 करोड़ शेयर खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है, जबकि कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों के लिए सुरक्षित है। इसके अलावा 50 लाख शेयर यानी कुल पूंजी के 0.04 प्रतिशत हिस्से को कर्मचारियों के लिए अलग रखा गया है। खुदरा निवेशकों के लिए अधिकतम बोली सीमा 2 लाख रुपये तय की गई है।

शेयर में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

मंगलवार सुबह कारोबार शुरू होते ही LIC के शेयरों पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सुबह करीब 10:55 बजे शेयर 7.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 397.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जबकि कारोबार के दौरान यह 390.50 रुपये के निचले स्तर तक भी लुढ़का। दिनभर के कारोबार में गिरावट का आंकड़ा 8.87 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे शेयर अपने पिछले लगभग चार महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

विश्लेषकों के मुताबिक, गिरावट की मुख्य वजहें ये रहीं:

डिस्काउंटेड फ्लोर प्राइस: बाजार भाव से करीब 10-11 प्रतिशत कम दाम पर शेयर बेचे जाने से मौजूदा शेयरधारकों में मुनाफावसूली और घबराहट देखी गई।

सप्लाई का दबाव: एक साथ बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में आने से शॉर्ट टर्म में सप्लाई-डिमांड का संतुलन बिगड़ा।

लॉन्ग टर्म प्राइस बेंचमार्क: नया फ्लोर प्राइस भविष्य में शेयर के लिए एक नया रेफरेंस पॉइंट बन गया, जिससे ट्रेडरों ने सतर्कता बरती। गौरतलब है कि LIC का शेयर बीते एक साल में करीब 12 प्रतिशत और चालू कैलेंडर वर्ष में लगभग 7 प्रतिशत टूट चुका है।

सरकार को कितनी होगी कमाई

अगर पूरा इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब होता है, तो सरकार को इस बिक्री से करीब 31,400 करोड़ रुपये (लगभग 3.3 अरब डॉलर) मिलने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार के विनिवेश कार्यक्रम की अब तक की सबसे बड़ी डील साबित हो सकती है। मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री और SUUTI से मिली रकम के जरिए 21,200 करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुकी है।

हिस्सेदारी बिक्री की वजह — SEBI का नियम

यह बिक्री सिर्फ राजस्व जुटाने के लिए नहीं, बल्कि पूंजी बाजार नियामक SEBI के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियम को पूरा करने के मकसद से भी की जा रही है। मई 2022 में हुए IPO के बाद सरकार के पास अब भी LIC में करीब 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि SEBI के नियमों के अनुसार सरकार को यह हिस्सेदारी घटाकर 2032 तक 75 प्रतिशत तक लानी है। यह IPO के बाद से सरकार की LIC में पहली बड़ी हिस्सेदारी बिक्री है।

आगे क्या

बाजार की निगाहें अब कंपनी के तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। LIC 6 अगस्त 2026 को अपने पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी करेगी। इसी दिन शाम 7 बजे कंपनी का प्रबंधन निवेशकों और विश्लेषकों के साथ अर्निंग्स कॉल में कारोबार, प्रीमियम कलेक्शन, मुनाफे और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेगा। जानकारों का मानना है कि अगर नतीजे मजबूत रहते हैं, तो OFS से हुई गिरावट की भरपाई तेजी से हो सकती है, जबकि कमजोर नतीजे शेयर पर दबाव और बढ़ा सकते हैं। बाजार जानकारों की सलाह है कि निवेशक 5 अगस्त को खुदरा हिस्से के लिए बोली लगाने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, वैल्यूएशन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ आउटलुक का आकलन जरूर करें। यह खबर सामान्य जानकारी के लिए है। शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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