Sugar Price Surge: पिछले कुछ हफ्तों में देश में चीनी की कीमतों में अचानक जोरदार उछाल आया है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। जुलाई के मध्य में जो चीनी औसतन 48 रुपये प्रति किलो के आसपास थी, वह अगस्त आते-आते बढ़कर 55 से 56 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है, जबकि देश के कई शहरों में खुदरा दुकानों पर भाव 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक वसूले जा रहे हैं। ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक होने के बावजूद भारत अचानक चीनी की इस किल्लत और महंगाई के दौर में कैसे फंस गया, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के मुख्य कारण
उत्पादन में गिरावट: इस साल मौसम की मार (अतिवृष्टि और जलभराव) और कीटों के प्रकोप के कारण गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है। चालू सीजन में चीनी का कुल उत्पादन अनुमानित 343 लाख टन से घटकर लगभग 306 लाख टन पर सिमट गया है, जबकि देश की वार्षिक घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन है।
सट्टेबाजी और जमाखोरी: खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, कीमतों में आए अचानक उछाल के पीछे कुछ मिलों और व्यापारियों द्वारा कृत्रिम किल्लत पैदा करने के लिए की गई जमाखोरी (होर्डिंग) भी एक बड़ा कारण रही है।
एक्स-मिल कीमतों में उछाल: थोक बाजारों में मिलगेट पर चीनी के दाम महज कुछ ही दिनों में 47-48 रुपये से बढ़कर काफी ऊपर चले गए, जिसे सरकार ने पूरी तरह ‘अनुचित’ करार दिया। महंगाई को थामने के लिए सरकार के कड़े कदम त्योहारी सीजन (दशहरा और दिवाली) से पहले बाजार में आपूर्ति सुधारने और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग एक दशक (10 साल) बाद एक बड़ा कदम उठाया है|
10 लाख टन चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के बिना आयात शुल्क (Duty-Free) आयात की अनुमति दे दी है। आम तौर पर भारत में चीनी आयात पर भारी-भरकम कर लगता है।
स्टॉक लिमिट की पाबंदी: जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए देश भर के चीनी डीलरों पर 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा तय कर दी गई है। इसके साथ ही, थोक उपभोक्ताओं (जैसे कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम निर्माताओं) के लिए भी स्टॉक रखने की सीमा सीमित की गई है।
अक्टूबर से ही गन्ने की पिराई: सरकार ने मिलों और राज्यों को 15 अक्टूबर से ही गन्ने की नई पिराई शुरू करने की सलाह दी है, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान अक्टूबर महीने में ही चीनी का पर्याप्त उत्पादन उपलब्ध हो सके।
आगे और बढ़ेंगे दाम या मिलेगी राहत? सरकार के इन सख्त दखल और ड्यूटी-फ्री आयात के फैसले से बाजार में सट्टेबाजों और जमाखोरों को कड़ा संदेश मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से घरेलू स्तर पर चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता तेजी से बढ़ेगी, जिससे आने वाले हफ्तों में खुदरा कीमतों में नरमी आ सकती है और त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को महंगाई से राहत मिल सकेगी।

