कोर्ट से क्लीनचिट मिलते ही बृजभूषण शरण सिंह का जगह जगह स्वागत, बोले खिलाड़ियों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा कोई और, विपक्ष को घेरा

Noida News: भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को अदालत से महिला रेसलर्स के मामले में बड़ी राहत और क्लीन चिट मिलने के बाद से लगातार उनका राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में जोरदार स्वागत किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा के सेक्टर-14 क्षेत्र में उनका भव्य अभिनंदन किया गया। इस स्वागत समारोह और प्रेसवर्ता के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगी साजिशों का जिक्र करते हुए रामचरितमानस, मंथरा और कैकेयी के प्रसंग के जरिए विरोधियों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। कोर्ट के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने पहली बार सार्वजनिक मंच से विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों को साजिश करार देते हुए कहा कि आरोप लगने के पहले दिन से लेकर आज तक उन्होंने स्वयं को कभी अपराधी नहीं माना। उन्होंने कहा कि उनके मन में कभी अपराधबोध नहीं आया और उन्हें शुरू से ही विश्वास था कि सच सामने आएगा।

महिलाओं की सुरक्षा के कानून जरूरी, लेकिन दुरुपयोग भी होता है

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून समाज के लिए बेहद आवश्यक हैं और उनका उद्देश्य महिलाओं की रक्षा करना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में इन कानूनों का दुरुपयोग देखने को मिलता है, जिससे निर्दोष लोगों को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

रामायण का उदाहरण देकर रखी अपनी बात

अपने वक्तव्य के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने रामायण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यदि कैकेयी भगवान राम को वनवास भेजने का वरदान नहीं मांगतीं तो भगवान राम केवल अयोध्या के राजा बनते, लेकिन वनवास के कारण ही वे मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में स्थापित हुए। उन्होंने कहा कि कैकेयी ने एक बड़े उद्देश्य के लिए जीवनभर कलंक अपने ऊपर लिया।

इसी संदर्भ में उन्होंने अपने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे कैकेयी के कंधे पर बंदूक रखकर चलाया गया था, उसी प्रकार कुछ लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर उनके खिलाफ आरोप लगवाए गए।

महाभारत और एकलव्य का भी किया जिक्र

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने संबोधन में महाभारत के द्रोणाचार्य और एकलव्य के प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां बड़े उद्देश्य के लिए लोगों को बदनाम होना पड़ा।

उन्होंने कहा, “एक कथित पहलवान के कंधे पर बंदूक रखकर चला दी गई। उनका भी कोई दोष नहीं है, उन्हें भी झूठा बदनाम कर दिया गया।” उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा कारण था, जिसका खुलासा उचित समय पर होगा।

अदालत से बरी होने के बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि यौन उत्पीड़न मामले में अदालत से बरी होने के बाद यह बृजभूषण शरण सिंह की पहली सार्वजनिक और विस्तृत प्रतिक्रिया मानी जा रही है। अपने संबोधन में उन्होंने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक और सुनियोजित साजिश से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया और न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा था।

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