वेनेज़ुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या 1,400 के पार, 51 हज़ार से ज़्यादा लापता, बचाव अभियान में तेज़ी

वेनेज़ुएला में बुधवार को आए दो ज़बरदस्त भूकंपों के तीन दिन बाद भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,430 तक पहुँच गई है, जबकि करीब 51 हज़ार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सभा (नेशनल असेंबली) के अध्यक्ष जॉर्ज रॉड्रिगेज़ ने शनिवार को बताया कि इस आपदा में 3,238 लोग ज़ख्मी हुए हैं और लगभग 3,142 परिवार बेघर हो गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्य झटकों के बाद से देश ने 430 से ज़्यादा बार-बार आने वाले हल्के भूकंप (आफ्टरशॉक्स) भी झेले हैं।

तटीय राज्य ला गुएरा सबसे ज़्यादा प्रभावित

7.2 और 7.5 तीव्रता के ये दोनों भूकंप बुधवार रात राजधानी कराकस के नज़दीक तटीय राज्य ला गुएरा के आसपास आए थे, जो वेनेज़ुएला के पर्यटन और रिसॉर्ट के लिए मशहूर इलाका है। दोनों झटके महज़ एक मिनट के भीतर आए, जिसकी वजह से कई इमारतों में रहने वाले लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक झटकों की कम गहराई के कारण सतह पर तबाही और भी ज़्यादा हुई। सरकार ने ला गुएरा को आपदाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है, और अब वहाँ दाख़िल होने के लिए विशेष अनुमति अनिवार्य कर दी गई है, क्योंकि सड़कों पर भारी अव्यवस्था बचाव कार्य में बाधा बन रही थी।

“गोल्डन विंडो” बंद होने की कगार पर

राहत एजेंसियों के मुताबिक, मलबे में दबे लोगों को ज़िंदा बचाने का “क्रिटिकल” समय 48 से 72 घंटे माना जाता है, और यह समयसीमा अब लगभग खत्म होने वाली है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी की वेनेज़ुएला निदेशक के अनुसार, बचाव दल अब तलाश के अंतिम घंटों में हैं, और भारी संसाधनों की कमी के बावजूद कई लोग अब भी मलबे में दबे रह सकते हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में सरकारी बचाव दल बहुत कम नज़र आए, जिसके कारण आम नागरिक खुद अपने हाथों से मलबा हटाकर अपनों की तलाश में जुटे हैं। अब तक सिर्फ 243 लोगों को ज़िंदा बचाया जा सका है।

अंतरराष्ट्रीय मदद का सिलसिला तेज़

वेनेज़ुएला सरकार के अनुसार अब तक करीब 1,600 विदेशी बचावकर्मी देश में पहुँच चुके हैं। मेक्सिको, अमेरिका, अल साल्वाडोर, स्विट्ज़रलैंड, कोलंबिया, स्पेन समेत कई देशों की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। अमेरिका ने फेयरफैक्स काउंटी (वर्जीनिया) और लॉस एंजेलिस से 80-80 सदस्यों की दो विशेष खोज-एवं-बचाव टीमें भेजी हैं, साथ ही मियामी-डेड फायर रेस्क्यू की फ्लोरिडा टास्क फोर्स-1 भी, जिसमें कुत्तों के दस्ते भी शामिल हैं कुल मिलाकर अमेरिका के करीब 250 बचावकर्मी मौजूद हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय पहले ही 15 करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान कर चुका है, और जल्द ही एक और बड़ा सहायता पैकेज घोषित होने की उम्मीद है। कराकस के पास सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का एक क्षतिग्रस्त रनवे मरम्मत के बाद अब चालू कर दिया गया है, जिससे राहत सामग्री पहुँचाने में तेज़ी आई है, जबकि दूसरा रनवे अब भी पूरी तरह टूटा हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) के मुताबिक इस आपदा से वेनेज़ुएला में लगभग 67 लाख 60 हज़ार लोग प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें से करीब 20 लाख सिर्फ कराकस में हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने अनुमान लगाया है कि भूकंप से सीधे हुए भौतिक नुकसान की लागत 4.7 से 8.7 अरब डॉलर के बीच हो सकती है। अधिकारियों ने आगाह किया है कि मरने वालों की संख्या आगे और बढ़ सकती है, क्योंकि स्वतंत्र डिजिटल डेटाबेस पर हज़ारों और लोगों के लापता होने की सूचनाएं दर्ज हो रही हैं, हालांकि इनमें से कुछ आँकड़े दोहराए गए (डुप्लिकेट) भी हो सकते हैं, और कई लोग सिर्फ मोबाइल नेटवर्क ठप होने की वजह से संपर्क में नहीं आ पा रहे।

सरकार पर सवाल, मदद के लिए नई हेल्पलाइन

कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज़ — जिन्होंने इस साल जनवरी में अमेरिकी कार्रवाई में पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाए जाने के बाद सत्ता संभाली थी — ने कहा है कि सरकार बचाव के इन “नाज़ुक घंटों” में हर संभव कोशिश कर रही है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी बात की, जिन्होंने बचाव दल और उपकरण भेजने की प्रतिबद्धता दोहराई। हालांकि कई इलाकों में नाराज़गी भी है, स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी मदद ज़रूरत के मुक़ाबले बहुत कम है। इस बीच सरकार ने लापता लोगों की सूचना देने और मदद के लिए एक नई हेल्पलाइन 0800-RESCATE शुरू की है, जिसे वेनऐप (VenApp) प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है। देश में पहले से चल रहे आर्थिक संकट के बीच यह भूकंप वेनेज़ुएला के लिए एक दशक से ज़्यादा समय में आई सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में शुमार हो गया है, और आने वाले हफ़्तों में राहत व पुनर्वास का काम और भी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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