Green Arch Society: ग्रेटर नोएडा। सेविअर ग्रीन आर्च सोसायटी में दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतें सामने आने के बाद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। सोसायटी के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि के बाद अथॉरिटी के जल विभाग ने बिल्डर सोसायटियों में निरीक्षण अभियान गुरुवार से शुरू कर दिया।
सात जगहों से लिए गए सैंपल, श्रीराम लैब भेजे गए
अभियान के पहले दिन सेविअर ग्रीन आर्च, चेरी काउंटी और हिमालया प्राइड सोसायटी के साथ-साथ क्षेत्र के चार नलकूपों से कुल सात पेयजल नमूने लिए गए। इन सभी नमूनों को जांच के लिए श्रीराम प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, विस्तृत रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लगेगा।
प्रारंभिक जांच में क्लोरीन, टीडीएस मानक स्तर पर
अथॉरिटी के सीनियर मैनेजर राजीव कुमार के मुताबिक, मौके पर की गई शुरुआती जांच में पानी में क्लोरीन, टीडीएस और टीएस की मात्रा तय मानकों के अनुरूप पाई गई। हालांकि अंतिम निष्कर्ष लैब की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। प्रथम दृष्टया अधिकारियों का मानना है कि गड़बड़ी सोसायटी के भीतरी जल नेटवर्क में खराबी के कारण हुई है, जिसे ठीक कराने के लिए संबंधित बिल्डर को नोटिस जारी किया जाएगा।
गेट तक जिम्मेदारी अथॉरिटी की, आगे बिल्डर की
अथॉरिटी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ग्रेनो अथॉरिटी सोसायटियों के मुख्य गेट तक ही पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करती है। इसके बाद आंतरिक पाइपलाइन बिछाने, पानी की टंकियों की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित बिल्डर व सोसायटी प्रबंधन की होती है। शिकायत मिलने के बाद जल विभाग की टीम ने गुरुवार को करीब तीन घंटे तक सोसायटी के पेयजल नेटवर्क की गहन जांच की।
फरवरी में भी हो चुकी है 350 सैंपल की जांच
अथॉरिटी अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले फरवरी महीने में भी सभी नलकूपों समेत 350 से अधिक स्थानों से पानी के नमूने लेकर जांच कराई गई थी, जिसमें सभी मानक सही पाए गए थे। अथॉरिटी का कहना है कि ताजा लैब रिपोर्ट आने के बाद जहां भी खामी सामने आएगी, उसे तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा।
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