परिसीमन बिल की प्रति जलाई: स्टालिन का काला झंडा आंदोलन, दक्षिण भारत एकजुट, संसद में टकराव तय

परिसीमन बिल की प्रति जलाई: केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के विरोध में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाया। स्टालिन ने नामक्कल में काला झंडा फहराया और केंद्र सरकार द्वारा परिचालित परिसीमन बिल की प्रति को आग लगा दी। इस दौरान वे और अन्य नेता काले कपड़े पहने नारे लगाते रहे। यह आंदोलन ठीक उस वक्त हुआ जब संसद का विशेष सत्र शुरू होने वाला था।

स्टालिन ने क्या कहा?

स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु भर में प्रतिरोध की लपटें फैल जाएं। फासीवादी भाजपा के अहंकार को नीचा दिखाया जाए।” उन्होंने 1960 के दशक के हिंदी विरोधी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि तमिलनाडु से उठी प्रतिरोध की आग ने दिल्ली को झुकने पर मजबूर किया था।

स्टालिन ने इस विधेयक को “साजिश” और “काला कानून” बताया तथा जनता से अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे फहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह “ऐतिहासिक अन्याय” है और चेतावनी दी — “मैं केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक विशाल राजनीतिक आंदोलन का नेता हूं। आप एक ऐसा तमिलनाडु देखेंगे जो पहले कभी नहीं देखा। हर परिवार सड़कों पर उतरेगा।”

विधेयक में क्या है?

केंद्र सरकार ने तीन विधेयकों का एक पैकेज पेश किया है  संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2025 जो 16 अप्रैल से शुरू विशेष संसद सत्र में प्रस्तुत किए जाने थे। इस विधेयक के तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है और परिसीमन 2026 से पूर्व की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।

विपक्ष की एकजुटता

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्षी दल संसद में परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेंगे। “वे परिसीमन को लेकर चालाकी कर रहे हैं, इसलिए सभी दलों ने एकमत होकर इस बिल का विरोध करने का फैसला किया है।”

राहुल गांधी ने इसे “राष्ट्र-विरोधी गतिविधि” करार दिया और कहा कि इससे दक्षिणी राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों को “भारी नुकसान” होगा।तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और केरल के सीएम पिनराई विजयन ने भी कड़ा विरोध जताया और दक्षिणी राज्यों का संयुक्त मोर्चा बनाने का आह्वान किया। टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे “राजनीतिक नाटक” बताया, जबकि समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं लेकिन पिछड़े वर्गों की उपेक्षा करने वाली इस “भाजपा की चालाकी” के खिलाफ हैं।

भाजपा और केंद्र का रुख

भाजपा नेताओं ने इस विधेयक का स्वागत किया और इसे “इस सदी का सबसे बड़ा निर्णय” बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर को “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि “दशकों की प्रतीक्षा अब समाप्त हो रही है।”

तमिलनाडु चुनाव से जोड़

यह सब ऐसे समय हो रहा है जब तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस आंदोलन से डीएमके को भाजपा-विरोधी और अल्पसंख्यक वोट एकजुट करने में मदद मिलने की उम्मीद है। संक्षेप में, परिसीमन विधेयक एक राष्ट्रीय राजनीतिक तूफान बन चुका है जिसमें दक्षिण बनाम उत्तर, विपक्ष बनाम केंद्र, और संघवाद बनाम बहुसंख्यकवाद की बड़ी बहस छिड़ी हुई है।​​​​​​​​​​​​​​​​

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