नोएडा में ISKCON मंदिर निर्माण पर विवाद, प्राधिकरण ने जारी किया ध्वस्तीकरण नोटिस, प्रबंधन बोला- जमीन अधिग्रहित नहीं

उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर-151A के कामबख्शपुर गांव में भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए बन रहे ISKCON मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। नोएडा प्राधिकरण ने डबल बेसमेंट निर्माण, नक्शे की स्वीकृति न होने और जिलाधिकारी की अनुमति न लेने का हवाला देते हुए मंदिर प्रबंधन को ध्वस्तीकरण नोटिस थमा दिया है। वहीं, मंदिर प्रबंधन ने प्राधिकरण की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए दावा किया है कि निर्माण वाली जमीन प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित नहीं की गई है और पूरा कार्य तकनीकी व सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है।

पुराने जर्जर मंदिर की जगह आधुनिक निर्माण

कामबख्शपुर गांव में स्थित पुराना ISKCON मंदिर समय के साथ काफी जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका था। श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने पुराने ढांचे को हटाकर उसी स्थान पर नया भव्य मंदिर बनाने का काम शुरू किया। वर्तमान में यहां डबल बेसमेंट सहित चार मंजिला (या अधिक) संरचना का निर्माण चल रहा है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि नया मंदिर भूकंपरोधी मानकों के अनुसार विशेषज्ञ आर्किटेक्ट्स द्वारा डिजाइन किया गया है, ताकि भक्तों को आधुनिक सुविधाओं के साथ सुरक्षित पूजा-पाठ का अवसर मिल सके। यह मंदिर नोएडा एक्सप्रेसवे के निकट सेक्टर-151A में स्थित है और ISKCON का दूसरा प्रमुख मंदिर होने जा रहा है। पहले से यहां भूमि पूजन आदि कार्यक्रम हो चुके हैं और निर्माण 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

प्राधिकरण की आपत्ति: नियमों का उल्लंघन

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्थल के निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए कई अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इनमें शामिल हैं: निर्माण नक्शे की प्राधिकरण से स्वीकृति। जिलाधिकारी (DM) से पूर्व अनुमति। बेसमेंट निर्माण के लिए निर्धारित नियमों का पालन।प्राधिकरण का आरोप है कि इनमें से कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जिसके चलते डबल बेसमेंट बनाए जाने पर आपत्ति जताई गई है। नोटिस जारी कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंदिर प्रबंधन का पलटवार

मंदिर प्रबंधन ने प्राधिकरण की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कामबख्शपुर गांव की यह जमीन नोएडा प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित नहीं की गई है, इसलिए निर्माण पर आपत्ति का कोई आधार नहीं बनता। प्रबंधन ने जोर देकर कहा कि निर्माण पूरी तकनीकी सावधानी, सुरक्षा मानकों और विशेषज्ञों की देखरेख में किया जा रहा है। इस मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। प्राधिकरण आगे क्या कदम उठाता है और मंदिर प्रबंधन अपनी आपत्ति को कैसे मजबूत करता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। संवाद और कानूनी रास्ते से विवाद का समाधान निकलने की संभावना जताई जा रही है।

पृष्ठभूमि और प्रभाव

नोएडा क्षेत्र में मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद नई बात नहीं हैं, लेकिन इस्कॉन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के संगठन के मंदिर पर यह नोटिस काफी चर्चा में है। श्रद्धालु इस विकास को सकारात्मक मान रहे हैं, जबकि प्रशासन नियमों की अनुपालन पर जोर दे रहा है। स्थानीय प्रशासन और प्राधिकरण से इस विवाद के शीघ्र समाधान की अपेक्षा की जा रही है, ताकि धार्मिक भावनाओं का सम्मान बरकरार रहे और विकास कार्य भी बिना बाधा के आगे बढ़ सके।

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