वक़्फ़ संपत्ति विवाद में वकील की सुपारी हत्या: कांग्रेस नेता समेत सात गिरफ़्तार, पार्टी ने किया निष्कासित

हैदराबाद पुलिस ने किया बड़ा खुलासा, हिट-एंड-रन की आड़ में रची गई थी सुनियोजित साज़िश, 15 लाख में दी गई थी सुपारी

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक हाई-प्रोफ़ाइल हत्याकांड ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। वक़्फ़ बोर्ड के पैनल वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता ख़्वाजा मुइज़ुद्दीन की हत्या, जिसे शुरू में हिट-एंड-रन हादसा समझा जा रहा था, दरअसल ₹15 लाख की सुपारी देकर की गई एक सुनियोजित हत्या थी। हैदराबाद पुलिस ने शुक्रवार को इस सनसनीखेज़ खुलासे के साथ तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के उपाध्यक्ष मुजाहिद आलम ख़ान और उनके पिता महबूब आलम ख़ान सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ़्तार किया है।

घटना की पूरी कहानी: सुबह की सैर बनी मौत का जाल

23 मई को सुबह लगभग 5:45 बजे, अधिवक्ता ख़्वाजा मुइज़ुद्दीन अपने मसाब टैंक स्थित आवास से रोज़ाना की तरह तैराकी के लिए निकले। जैसे ही वे अपनी गाड़ी की ओर बढ़े, बिना नंबर प्लेट वाली एक हरे रंग की महिंद्रा स्कॉर्पियो तेज़ रफ़्तार से उन पर चढ़ा दी गई और वह लगभग 10 मीटर दूर जा गिरे। गंभीर चोटों के बाद उन्हें पहले महावीर अस्पताल और फिर ओम्नी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले को शुरुआत में हिट-एंड-रन दर्ज किया, लेकिन जाँच के दौरान सीसीटीवी फ़ुटेज ने पूरी साज़िश उजागर कर दी।

पुलिस की जाँच: CCTV ने खोली साज़िश की परतें

पुलिस ने सिकंदराबाद के पंचवटी लॉज और नारायणगुड़ा के मेहफ़िल होटल सहित कई प्रतिष्ठानों की सीसीटीवी फ़ुटेज खंगाली। फ़ुटेज से यह साफ़ हो गया कि बिना नंबर प्लेट वाली स्कॉर्पियो पहले से वकील के घर के बाहर इंतज़ार में खड़ी थी और उनकी हरकतों पर नज़र रखी जा रही थी। साज़िश की शुरुआत 2026 की शुरुआत में हुई। जनवरी 2026 से ही किराए के हत्यारों ने नाम्पल्ली स्थित वकील के घर के नज़दीक उनकी दिनचर्या की निगरानी शुरू कर दी थी। मुजाहिद आलम ख़ान ने अपने सहयोगी हसन अली उर्फ़ ‘चाउस’ के ज़रिए हमले के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिना नंबर की पुरानी गाड़ी ख़रीदने के लिए ₹2 लाख मुहैया कराए।

हत्या का नेटवर्क: बिचौलियों की लंबी श्रृंखला

पुलिस के अनुसार, मुजाहिद आलम ख़ान और महबूब आलम ख़ान ने अपने करीबी सहयोगियों हसन अली उर्फ़ ‘चाउस’ और मुनीर के ज़रिए किशन उर्फ़ ‘पप्पू’ तक साज़िश पहुँचाई। मुनीर और चाउस ने किशन को नकद रकम सौंपी, जिसने विनय को काम सौंपा। विनय ने विक्रम के ज़रिए अभिजीत उर्फ़ ‘नानी’ को मैदान में उतारा, और मनीदीप उर्फ़ ‘पोगो नानी’ भी इस दल का हिस्सा था। पुलिस ने मास्टरमाइंड मुजाहिद आलम ख़ान को जुबली हिल्स स्थित उनके निवास से और महबूब आलम ख़ान को उनके घर से गिरफ़्तार किया। अन्य आरोपी अभिजीत उर्फ़ नानी, विनय, विक्रम उर्फ़ चिंटू और मनीदीप उर्फ़ पोगो नानी को गौलीगुड़ा स्थित MGBS के नज़दीक से गिरफ़्तार किया गया।

हत्या की जड़: 2013 से चला आ रहा वक़्फ़ संपत्ति विवाद

पुलिस के अनुसार, यह हत्या 2013 से चले आ रहे उस विवाद का परिणाम है जिसमें मुजाहिद आलम ख़ान के परिवार और ख़्वाजा मुइज़ुद्दीन के बीच मलकपेट और लकड़ीकापुल की वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर अनेक आपराधिक, दीवानी और वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के मुकदमे वर्षों से लंबित थे। आरोपियों का मानना था कि वकील की सक्रिय कानूनी भूमिका उन्हें लगातार कानूनी हार और अपमान दिला रही थी, जिसके चलते उन्होंने हत्या की साज़िश रची। हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मलकपेट और लकड़ीकापुल की वक़्फ़ संपत्तियों के प्रशासन, नियंत्रण और वित्तीय प्रबंधन को लेकर ख़्वाजा मुइज़ुद्दीन, महबूब आलम ख़ान और मुजाहिद आलम ख़ान के बीच एक दशक से लंबी लड़ाई चली आ रही थी।”

राजनीतिक भूचाल: कांग्रेस ने दोनों को किया निष्कासित-निलंबित

इस गिरफ़्तारी से तेलंगाना की राजनीति में भूचाल आ गया है। तेलंगाना कांग्रेस ने TPCC उपाध्यक्ष मुजाहिद आलम ख़ान को पार्टी से निष्कासित कर दिया है, जबकि वरिष्ठ नेता महबूब आलम ख़ान को निलंबित कर दिया गया है। TPCC अनुशासन समिति के अध्यक्ष और सांसद मल्लू रवि ने यह घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी ने मामले को गंभीरता से लिया है।महबूब आलम ख़ान अनवर-उल-उलूम एजुकेशनल एसोसिएशन के सचिव भी हैं, जो इस मामले को शिक्षा जगत से भी जोड़ता है।

आगे की जाँच: मनी ट्रेल और पुराने मामलों की होगी पड़ताल

पुलिस ने कहा कि फ़रार आरोपियों का पता लगाने, हत्या की सुपारी के पैसों के स्रोत का पता लगाने और महबूब आलम ख़ान व मुजाहिद आलम ख़ान की अन्य आपराधिक मामलों में संलिप्तता की जाँच जारी है। अधिकारियों ने ख़्वाजा मुइज़ुद्दीन के परिवार को धमकियों की रिपोर्ट के बाद उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई है। पुलिस आयुक्त ने यह भी बताया कि सातों प्राथमिक आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा और आगे की गहन जाँच जारी रहेगी। यह मामला न केवल एक वरिष्ठ वकील की नृशंस हत्या का है, बल्कि वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर चल रहे विवादों, राजनीतिक संरक्षण और संगठित अपराध के ख़तरनाक गठजोड़ को भी उजागर करता है। हैदराबाद पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जाँच पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से और किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना की गई है।

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