Coal scam case: नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 29 जुलाई को कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े एक आपराधिक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कार्यवाही को बंद कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ जारी समन आदेश को भी रद्द कर दिया गया।
कौन थी बेंच?
CJI सूर्य कांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस V मोहना की तीन-सदस्यीय बेंच ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि सिंह के निधन के कारण यह अपील निष्फल मानी जा सकती थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश द्वारा संज्ञान लेने और समन जारी करने के पहलू पर विचार करने के लिए बेंच ने CBI की दोनों क्लोजर रिपोर्ट्स का अवलोकन किया। बेंच ने पाया कि जांच एजेंसी की रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार करने और संज्ञान लेने का कोई ठोस आधार विशेष न्यायाधीश के पास नहीं था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2005 में ओडिशा के तलाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। इसमें मनमोहन सिंह के अलावा उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और तीन अन्य को विशेष अदालत ने आरोपी के तौर पर तलब किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस आदेश पर रोक लगा दी थी। विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने 11 मार्च 2015 को CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए सिंह और अन्य आरोपियों को 8 अप्रैल 2015 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। अपनी याचिका में मनमोहन सिंह ने तर्क दिया था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनिवार्य मंजूरी (सैंक्शन) नहीं ली गई थी, साथ ही उन्होंने कोयला ब्लॉक आवंटन के फैसले में किसी भी तरह की आपराधिकता से इनकार किया था। गौरतलब है कि मनमोहन सिंह का दिसंबर 2024 में निधन हो चुका है, और अब वे इस बहुचर्चित मामले में औपचारिक रूप से पूरी तरह बरी हो चुके हैं।

