नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके को शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। उन्हें कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई निवारक कदम के तौर पर की गई। हिरासत के दौरान अफरा-तफरी का माहौल रहा और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की।
“किस कानून के तहत हिरासत?”
हिरासत के समय दिपके ने पुलिस से सवाल किया, “मैंने कोई कानून नहीं तोड़ा है। आप मुझे कैसे हिरासत में ले सकते हैं? किस कानून के तहत मुझे हिरासत में लिया जा रहा है?” इससे पहले दिपके करोल बाग स्थित अपने आवास से कनॉट प्लेस के लिए निकले थे। CJP ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस उन्हें प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकती है, तो संगठन के पास ‘प्लान बी’ तैयार है। CJP ने शुक्रवार शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया था। दिपके ने लोगों से राष्ट्रीय ध्वज लहराने की अपील की थी। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे अभियान का हिस्सा है। आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। हिरासत के बीच तीन महिलाओं को सेंट्रल पार्क के पास तिरंगा फहराने की अनुमति दी गई। वहीं, अंतिम समय में योजना बदलने के बाद AISA की नेता नेहा बोरा और अन्य सदस्य मंडी हाउस में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।
प्रशांत भूषण के बयान से गरमाई सियासत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ‘रीजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा, “यह सरकार कहती रहती है कि यह विपक्ष का रीजीम चेंज ऑपरेशन है। हम केवल चुनावी लोकतंत्र बचाने की अपील कर रहे हैं। अगर ऐसी बर्बरता जारी रही तो रीजीम चेंज जरूर होगा। हम सब रीजीम चेंज चाहते हैं। इसमें गलत क्या है? यह हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।” इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और अभिनेता प्रकाश राज समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
बांग्लादेश का जिक्र बना मुद्दा
विवाद की एक और कड़ी AISA अध्यक्ष नेहा बोरा का बयान है। 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन में वीडियो संदेश देते हुए बोरा ने कहा था कि भारत में दिख रहा जेन-जेड आंदोलन पहले बांग्लादेश में शुरू हुआ और “रास्ता दिखाने” के लिए उन्होंने बधाई दी। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे “रीजीम चेंज की खुली स्वीकारोक्ति” बताया और राहुल गांधी पर निशाना साधा।
राजनाथ सिंह, फडणवीस, सावंत ने साधा निशाना
शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर युवाओं को मोहरा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि हमें संवाद और राष्ट्र निर्माण का रास्ता चुनना चाहिए, टकराव का नहीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाना ही इनका मकसद है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सवाल उठाया कि क्या सत्ता परिवर्तन चुनाव से चाहा जा रहा है या “असंवैधानिक आंदोलन” से। BJP सांसद संबित पात्रा और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। पात्रा ने यूट्यूबर ध्रुव राठी की सेना और पुलिस पर टिप्पणी को लेकर भी हमला बोला। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस और CJP पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर फोर्ड फाउंडेशन और CIA की कथित भूमिका को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह को “जग्गा जासूस” और “शेरलॉक होम्स” कहकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कभी नहीं छिपाया कि वह चुनाव के जरिए सरकार बदलना चाहता है। खेड़ा ने कहा, “1977 में क्या हुआ था? क्या सत्ता नहीं बदली? लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन चुनाव से ही होता है, विपक्ष का और क्या उद्देश्य होगा?”
दिपके की सफाई: “हम सिर्फ जवाबदेही मांग रहे हैं”
गुरुवार देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने CJP को रीजीम चेंज की मांग से अलग किया। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ जवाबदेही मांग रहे हैं। हम सत्ता परिवर्तन की बात नहीं कर रहे। हम बस इतना कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटाकर निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से नया चुनाव आयुक्त नियुक्त किया जाए। क्या यह अपराध है?”
पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में कोटा को लेकर छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था। कड़ी कार्रवाई, गिरफ्तारियों और इंटरनेट बंदी के बाद यह आंदोलन शेख हसीना के इस्तीफे की मांग में बदल गया। 5 अगस्त को हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा।ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार ‘रीजीम चेंज’ का अर्थ सरकार या राजनीतिक व्यवस्था का बदलना है, जो अक्सर बल या बाहरी हस्तक्षेप से जुड़ा होता है, हालांकि आम बोलचाल में इसे राजनीतिक नेतृत्व परिवर्तन के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। संसदीय लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सरकार बदलना संवैधानिक प्रक्रिया है।
राजनीतिक असर
SIR और चुनाव आयोग को लेकर जो मुद्दा अब तक सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था, वह अब आंदोलनकारियों की मंशा पर बहस में बदलता दिख रहा है। BJP ने अलग-अलग आंदोलनों को एक बड़े सरकार-विरोधी अभियान के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जबकि दिपके को अपने संगठन का उद्देश्य स्पष्ट करना पड़ा है।

