CJP Protest LIVE: नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते कई हफ्तों से चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन मंगलवार को और तेज़ हो गया, जब दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने जबरन उठाकर गाड़ियों में बिठाया। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके सभी सांसदों को बर्बरता से हिरासत में लिया जा रहा है।
खरगे के घर बैठक, फिर पीएम आवास के बाहर धरना
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई रणनीतिक बैठक के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अपने सैकड़ों समर्थकों और सांसदों के साथ पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के खिलाफ कथित पुलिसिया दमन पर प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफे की मांग की। धरने में पवन खेड़ा, रणदीप सुरजेवाला और गुरदीप सिंह सप्पल जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
एक दिन पहले संसद कूच पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के आरोप
दरअसल यह पूरा घटनाक्रम सोमवार को CJP के “चलो संसद” मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद भड़का है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और डिंपल यादव जैसी नेताओं को भी रोका गया। सोमवार की झड़प के बाद भी आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा और CJP ने साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता, जंतर मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। सरकार के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रहने और पुलिसिया सख्ती की शिकायतों के बीच संगठन ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और तीन शर्तें
लद्दाख के जाने-माने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और NEET पेपर लीक व CBSE ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन में अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना है। बीते सप्ताह पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने और सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद वांगचुक ने इसे “अवैध हिरासत” करार दिया था। बिगड़ती सेहत के बावजूद उन्होंने ऐलान किया कि उनका उपवास “संसद चलो” मार्च के बाद भी तभी टूटेगा जब सरकार शिक्षा व्यवस्था की खामियों की जिम्मेदारी ले और राजनीतिक नेता संसद में पेपर लीक का मुद्दा उठाने का आश्वासन दें।
कौन है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)?
गौरतलब है कि CJP की शुरुआत 16 मई 2026 को राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने की थी। यह आंदोलन उस विवाद के बाद खड़ा हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” से कर दी थी। शुरुआत में महज़ एक सोशल मीडिया अभियान के तौर पर उभरी CJP को कुछ ही दिनों में लाखों समर्थक मिल गए और इसने भाजपा के नाम की पैरोडी करते हुए खुद को “आलसी और बेरोजगारों की आवाज़” बताया। संगठन चुनाव आयोग में पंजीकृत नहीं है, बावजूद इसके इसके कार्यकर्ता कॉकरोच के वेश में सड़कों पर प्रदर्शन और सफाई अभियान चला चुके हैं।
प्रवक्ता विजेता दहिया बर्खास्त, बर्गर खाते वीडियो पर विवाद
आंदोलन के बीच CJP ने अपनी ही प्रवक्ता विजेता दहिया के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया है। पार्टी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच X पर बयान जारी कर बताया कि जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी और उनकी अपनी टीम पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई झेल रहे थे, उसी दौरान दहिया का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह दिल्ली के एक मशहूर फास्ट-फूड आउटलेट पर नजर आईं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। CJP ने इसे “बेहद असंवेदनशील व्यवहार” बताते हुए कहा कि यह आंदोलन के मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ है, इसलिए दहिया को तत्काल प्रभाव से सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है।
सुरक्षा में भारी इजाफा, आगे क्या?
मंगलवार की घटनाओं के बाद जंतर मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग बढ़ा दी है, वहीं घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पतालों से छुट्टी मिलने के बाद आंदोलन एक बार फिर बिखरा हुआ नजर आया। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर बातचीत में गंभीरता न दिखाने और पुलिस बर्बरता का आरोप लगाया है, जबकि CJP ने दोहराया है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव और तेज़ होने के आसार हैं।

