Controversy over the theft of the silver chariot from the famous Thakur Banke Bihari temple in Mathura: सेवायतों में तीखी बहस, एक ने लगाए आरोप तो दूसरे ने मांगा सबूत या माफी

Controversy over the theft of the silver chariot from the famous Thakur Banke Bihari temple in Mathura: विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में कथित चांदी के रथ चोरी का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सोशल मीडिया पर सेवायत और पूर्व हाई पावर कमेटी सदस्य दिनेश गोस्वामी द्वारा उठाए गए आरोपों ने श्रद्धालुओं और गोस्वामी समाज में हलचल मचा दी है। कुछ पोस्ट्स में इसकी तुलना अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद से की जा रही है और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। मंदिर के सेवायत एवं हाई पावर कमेटी सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिर परिसर में किसी प्रकार की चोरी या डकैती की कोई घटना नहीं हुई। हिमांशु गोस्वामी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मंदिर की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

हिमांशु गोस्वामी का बयान:
“यदि कोई व्यक्ति चांदी के रथ चोरी का दावा कर रहा है तो उसे पहले यह साबित करना होगा कि संबंधित रथ मंदिर की संपत्ति था। रथ का स्वामित्व, खरीद का बिल और मंदिर के अभिलेखों में दर्ज रिकॉर्ड सार्वजनिक करें। जिन रथों का जिक्र किया जा रहा है, वे संबंधित गोस्वामी परिवारों के निजी रथ हैं, जिन्हें सेवा के दौरान ठाकुरजी के उपयोग के लिए मंदिर में लाया जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि वास्तव में चोरी हुई है तो संबंधित व्यक्ति तुरंत पुलिस में मुकदमा दर्ज कराए और निष्पक्ष जांच कराए। आरोप सिद्ध न होने पर गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं से सार्वजनिक माफी मांगे। इस पूरे मामले पर आगामी हाई पावर कमेटी की बैठक में चर्चा की जाएगी।

पृष्ठभूमि और पिछले विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब बांके बिहारी मंदिर से चांदी गायब होने के आरोप लगे हैं। जनवरी 2026 में गर्भगृह की चौखट और देहरी से चांदी की परत गायब होने की अफवाहें वायरल हुई थीं। उस समय भी प्रबंधन ने स्पष्ट किया था कि चोरी नहीं हुई, बल्कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए केमिकल युक्त इत्र की रासायनिक प्रतिक्रिया से चांदी क्षतिग्रस्त हुई है। लगभग 10.5 किलो चांदी की परत एक श्रद्धालु द्वारा चढ़ाई गई थी, जो अब रसायनों के प्रभाव से नष्ट हो रही है। अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी ने मंदिर के 54 साल से बंद तोषखाने (तहखाना) को खोला था। वहां सोने-चांदी की छड़ें, रत्न, कीमती बर्तन और सिक्के मिले, लेकिन पूर्ण दस्तावेज और अपेक्षित खजाना न मिलने से सवाल उठे थे। दिनेश गोस्वामी जैसे सेवायतों ने पहले भी पारदर्शिता और जांच की मांग की है।

सोशल मीडिया और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ा है। कई यूजर्स निष्पक्ष जांच, सीबीआई या एसआईटी जांच और मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। कुछ पोस्ट्स में राम मंदिर चढ़ावा विवाद का जिक्र कर समानताएं गढ़ी जा रही हैं। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि अफवाहों पर विश्वास न करें और भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ न होने दें। सुरक्षा बढ़ाने के लिए पहले भी गर्भगृह क्षेत्र में सीसीटीवी लगाने का फैसला लिया गया था।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ और स्थानीय?

मंदिर की हाई पावर कमेटी (सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित) के पास इस संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होने का दावा किया गया है। कमेटी अध्यक्ष विस्तृत जानकारी देंगे। गोस्वामी समाज के कुछ सदस्यों का मानना है कि निजी और मंदिर की संपत्ति में अंतर स्पष्ट होना चाहिए ताकि गलतफहमियां दूर हों।

पुलिस की भूमिका: अभी तक कोई आधिकारिक एफआईआर दर्ज होने की खबर नहीं है। यदि आरोपकर्ता सबूत पेश करते हैं तो जांच शुरू हो सकती है। यह विवाद मंदिर प्रबंधन, गोस्वामी परिवार और श्रद्धालुओं के बीच विश्वास का मुद्दा बनता जा रहा है। हाई पावर कमेटी की अगली बैठक में इस पर क्या फैसला होता है, इस पर सबकी नजर है। नवभारत टाइम्स समेत अन्य मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, फिलहाल कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग मजबूत हो रही है। जय बांके बिहारी जी! मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है। किसी भी गलतफहमी को तथ्यों के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।

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