भारत ने दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, जापान-अमेरिका से मिलाया हाथ
चीन ने पिछले दो वर्षों में भारत के खिलाफ एक ऐसी आर्थिक रणनीति अपनाई, जिसने दिल्ली के नीति-निर्माताओं से लेकर देश के किसानों, वाहन उद्योग और बुनियादी ढाँचे तक सभी को हिला कर रख दिया। रेयर अर्थ मैग्नेट, उर्वरक और सुरंग खोदने वाली मशीनें तीन ऐसे उत्पाद जिन पर बीजिंग ने प्रतिबंध की तलवार लटका दी। लेकिन भारत ने न सिर्फ इस दबाव का सामना किया, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई इबारत भी लिखनी शुरू कर दी।
चीन ने किन-किन उत्पादों पर लगाया था प्रतिबंध?
चीन ने अप्रैल 2025 से रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी। इसके साथ ही विशेष उर्वरकों — जिनमें जल-घुलनशील, धीमी-रिलीज़, और सूक्ष्म पोषक तत्व उर्वरक शामिल हैं — के शिपमेंट भी चीनी बंदरगाहों पर रोक लिए गए। इस उर्वरक प्रतिबंध ने रेयर अर्थ मैग्नेट और सुरंग खोदने वाली मशीनों (टनल बोरिंग मशीन) पर पहले से लगाई जा रही रोक की सूची को और लंबा कर दिया।
तीन मुख्य प्रतिबंधित क्षेत्र थे:
1. रेयर अर्थ मैग्नेट और खनिज: भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में अपने 93 प्रतिशत रेयर अर्थ मैग्नेट चीन से आयात किए थे। प्रतिबंध लगने के बाद भारत के पास केवल दो से तीन सप्ताह का ही भंडार बचा था।
2. उर्वरक (DAP): डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) भारत का दूसरा सबसे अधिक उपभोग किया जाने वाला उर्वरक है। 2023-24 में भारत ने चीन से 22.9 लाख टन DAP आयात किया था, लेकिन 2024-25 में यह आँकड़ा घटकर मात्र 8.4 लाख टन रह गया और जनवरी 2025 के बाद से शून्य हो गया।
3. टनल बोरिंग मशीनें: चीन ने भारत के बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए भेजी जाने वाली टनल बोरिंग मशीनें भी रोक दीं, इनमें वे मशीनें भी शामिल थीं जो चीन में स्थित विदेशी कंपनियों ने तैयार की थीं। इससे देश के मेट्रो, सड़क और रेल सुरंग परियोजनाएं ठप पड़ने लगीं।
चीन की यह चाल थी कितनी बड़ी?
9 अक्टूबर 2025 को चीन के वाणिज्य मंत्रालय (MOFCOM) ने एक नई और बड़ी घोषणा की, इस बार रेयर अर्थ, बैटरी और सुपर-हार्ड मटेरियल से जुड़े उत्पादों और तकनीकों पर व्यापक निर्यात नियंत्रण लागू किए गए। पहली बार चीन ने अपने नियंत्रण का अधिकार क्षेत्राधिकार से बाहर, यानी अन्य देशों में बने उन उत्पादों पर भी लागू किया जो चीनी सामग्री या तकनीक से बने थे। चीन ने कुल 17 रेयर अर्थ धातुओं में से 12 पर निर्यात प्रतिबंध लगा दिए — अप्रैल में सात तत्वों पर (सैमेरियम, गैडोलिनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यट्रियम) और अक्टूबर में पाँच और तत्व (होल्मियम, एरबियम, थुलियम, यूरोपियम और यटर्बियम) जोड़े गए।
भारत ने की राजनयिक पहल — और मिला जवाब
भारत सरकार चुप नहीं बैठी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ कई दौर की बातचीत की। चीन ने भारत को आश्वासन दिया कि उर्वरक, रेयर अर्थ मैग्नेट और टनल बोरिंग मशीनों पर लगे प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की कि शिपमेंट पहले ही शुरू हो चुकी है। इस रणनीतिक राहत को विश्लेषक भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य विघटन के बाद व्यापक विश्वास-निर्माण प्रयासों का हिस्सा मान रहे हैं।
क्या अब भी जारी है प्रतिबंध?, स्थिति मिश्रित है
भारत के संदर्भ में चीन ने रेयर अर्थ पर लगे प्रतिबंध हटाए, लेकिन अमेरिका अभी भी चीनी निर्यात नियंत्रण के दायरे में है। सैमेरियम, गैडोलिनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यट्रियम जैसे तत्वों पर प्रतिबंध अमेरिका के लिए बरकरार है। चीन ने टंगस्टन, टेलुरियम, बिस्मथ, मोलिब्डेनम, इंडियम और अन्य रणनीतिक खनिजों पर 2025 में जारी शुरुआती नियंत्रण बरकरार रखे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ बिगड़ती हैं तो 2026 के अंत में फिर से नियंत्रण कड़े किए जा सकते हैं। यह विराम सुलह नहीं, बल्कि पुनर्गणना का मौका है।
भारत का जवाब: आत्मनिर्भरता की ओर बड़ी छलाँग
चीन के इस आर्थिक दाँव ने भारत को आत्मनिर्भरता की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया।
घरेलू मोर्चे पर:
नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना को मंज़ूरी दी, ₹73 अरब (80 करोड़ डॉलर) की यह योजना सात वर्षों में 6,000 मेट्रिक टन प्रति वर्ष की एकीकृत क्षमता बनाने का लक्ष्य रखती है।
जापान से साझेदारी:
जापान भारत के राजस्थान और गुजरात में स्थित रेयर अर्थ भंडारों में संयुक्त अन्वेषण के लिए बातचीत कर रहा है। इन राज्यों में तीन हार्ड रॉक रेयर अर्थ भंडार चिह्नित किए गए हैं जिनमें अनुमानित 12.9 लाख मेट्रिक टन रेयर अर्थ ऑक्साइड है। भारत और जापान के खनन मंत्रालयों ने अगस्त 2025 में खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग का समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया। टोयोटा त्सुशो की आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ रिफाइनिंग परियोजना भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
अमेरिका के साथ:
जनवरी 2026 में अमेरिका ने G7 देशों और सहयोगियों की मंत्री-स्तरीय बैठक आयोजित की जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य रेयर अर्थ आपूर्ति श्रृंखला को चीन से अलग करना था।
विशेषज्ञों की राय
भारत के पास आंध्र प्रदेश और ओडिशा में पर्याप्त रेयर अर्थ भंडार हैं, लेकिन निष्कर्षण, पृथक्करण और शोधन क्षमता अभी भी अविकसित है। यह प्रसंस्करण चरण वह है जहाँ चीन का एकाधिकार है, और इसे चुनौती देना जटिल, पूंजी-गहन और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील कार्य है।
दोस्ती का नाटक या स्थायी राहत?
चीन ने रेयर अर्थ, DAP उर्वरक और टनल बोरिंग मशीनों पर भारत के लिए रोक को फिलहाल हटा लिया है। लेकिन यह राहत कूटनीतिक दबाव और LAC पर सैन्य सामान्यीकरण की उपज है, न कि किसी स्थायी नीति परिवर्तन की। भारत इस सबक को अच्छी तरह समझ चुका है। राजस्थान की खदानों से लेकर आंध्र की रिफाइनरी तक, और QUAD की भागीदारी से लेकर ₹73 अरब की मैग्नेट योजना तक भारत अब चीन के ‘दुर्लभ हथियार’ की काट तैयार कर रहा है। जैसा कि विशेषज्ञ कहते हैं, रेयर अर्थ अब सिर्फ खनिज नहीं, यह 21वीं सदी की भू-राजनीति का सबसे महत्त्वपूर्ण मोहरा बन चुका है।

