फर्जी परमिट पर भेजा था ट्रेक पर, एजेंसी का लाइसेंस रद्द; दो दोस्त हिरासत में, परिजन बेहाल
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से 29 मई की आधी रात को रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुई एमबीए छात्रा बबीता पांडे का आज आठवें दिन भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और वन विभाग के करीब 150 जवान पांच किलोमीटर के दायरे में घने जंगलों, खड़ी ढलानों, गुफाओं और ट्रैकिंग मार्गों पर ड्रोन व खोजी कुत्तों के साथ तलाशी अभियान में लगे हुए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। इस बीच, मामले ने एक नया मोड़ लिया है जब खोज दल का पूरा ध्यान गोई कैंप स्थल के बेहद करीब स्थित एक रहस्यमयी झील पर केंद्रित हो गया है।
कौन हैं बबीता पांडे?
रामनगर, नैनीताल की रहने वाली 24 वर्षीय बबीता पांडे एमबीए की छात्रा हैं। वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई पहले ही पूरी कर चुकी हैं और वर्तमान में एमबीए कर रही थीं। परिवार में बुजुर्ग और दिव्यांग पिता गोपाल पांडे, माता तथा भाई हर्षित हैं। बबीता के पिता गोपाल पांडे ने मीडिया से गुहार लगाते हुए कहा, “यदि कोई खबर होती तो हमें वहाँ से मिल जाती। पाँच दिन हो गए हैं। मैं प्रशासन से अनुरोध कर रहा हूँ कि जल्द से जल्द तलाशी अभियान चलाया जाए। सभी बहुत चिंतित हैं।”
29 मई की उस रात क्या हुआ?
बबीता पांडे अपने दो दोस्तों — उधम सिंह नगर निवासी हरमनपाल सिंह और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी हरमनप्रीत सिंह — के साथ 25 मई को देहरादून पहुँची थी। इसके बाद तीनों ने हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थलों का दौरा किया। 28 मई को तीनों रायथल गांव में रुके, जहाँ उन्हें आखिरी बार सीसीटीवी कैमरों में देखा गया। 29 मई को उन्होंने रायथल से दयारा बुग्याल ट्रैक शुरू किया और रात को गोई बेस कैंप पर डेरा डाला। आधी रात के बाद बबीता अचानक कैंप से लापता हो गईं। दोनों साथियों का कहना है कि वे सो गए थे, और जब आँख खुली तो बबीता वहाँ नहीं थी।
झील बनी आखिरी उम्मीद — डीप डाइव टीम उतरी पानी में
छह सदस्यीय डीप डाइव टीम अब बुग्याल के आसपास की झीलों और खाइयों में बबीता की तलाश कर रही है। पाँच दिनों से जारी व्यापक खोज में जंगलों, पहाड़ी ढलानों, ट्रैकिंग मार्गों और दुर्गम इलाकों को खंगाला जा चुका है, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। अब विशेषज्ञ गोताखोरों की यह टीम आधुनिक उपकरणों से झील की गहराई में छानबीन कर रही है।
हर कोण से जांच, लेकिन अब तक कोई ब्रेकथ्रू नहीं
उत्तरकाशी की एसपी कमलेश उपाध्याय के अनुसार, पुलिस दुर्घटना, रास्ता भटकने, जंगली जानवर के हमले और आपराधिक साजिश हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। बबीता के भाई हर्षित की शिकायत पर दोनों साथियों हरमनपाल और हरमनप्रीत के खिलाफ अपहरण की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया गया है। कई दिनों की गहन पूछताछ के बाद भी पुलिस को उनके बयानों से कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।
फर्जी परमिट रैकेट का भंडाफोड़ — ट्रैकिंग एजेंसी पर गिरी गाज
इस मामले ने उत्तराखंड के ट्रैकिंग परमिट तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। जांच में सामने आया कि परमिट पर अनंत की जगह हरमनप्रीत, आराधना की जगह बबीता और रवि के स्थान पर हरमनपाल सिंह का नाम दर्ज था, यानी परमिट किसी और के नाम पर जारी हुआ और बाद में नाम बदले गए। उत्तरकाशी जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने बताया कि तीनों के पास आधिकारिक पर्यटन पोर्टल ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ पर कोई वैध डिजिटल परमिट नहीं था। इसके बाद ट्रैकिंग एजेंसी ‘प्रो माउंटेन’ का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पर्यटन विभाग ने जिला मजिस्ट्रेट से एजेंसी पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की है।
दयारा ट्रैक पर लगी रोक — SOP का हवाला
इस घटना के बाद वन विभाग ने एसओपी (Standard Operating Procedure) का हवाला देते हुए दयारा बुग्याल पर ट्रेकिंग को फिलहाल बंद कर दिया है ताकि सर्च ऑपरेशन में कोई बाधा न आए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
परिजनों की गुहार, सोशल मीडिया पर अपील
बबीता की माँ और भाई हर्षित मौके पर मौजूद रहकर रेस्क्यू टीम की मदद कर रहे हैं। पुलिस ने बबीता की तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर आम जनता से अपील की है कि कोई भी जानकारी हो तो हेल्पलाइन नंबर 01374-222116 पर सूचित करें।
सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं
आठ दिन बाद भी यह मामला गहरे रहस्य में डूबा हुआ है। क्या बबीता रात के अँधेरे में रास्ता भटककर किसी दुर्घटना का शिकार हुईं? क्या झील में कुछ मिलेगा? या फिर इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है? इन सवालों के जवाब अभी तक न पुलिस के पास हैं, न परिजनों के पास। जांच जारी है, उम्मीद जारी है — और एक परिवार की आँखें लगातार पहाड़ की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। सूचना हेल्पलाइन: 01374-222116 | उत्तरकाशी पुलिस

