रांची की अवनि केजरीवाल बनीं CBSE 12वीं की राष्ट्रीय टॉपर, पुनर्मूल्यांकन में मिले पूरे 500/500 अंक

95.2% से सीधे 100% पुनर्मूल्यांकन ने बदली अवनि की किस्मत, अंग्रेज़ी और बिज़नेस स्टडीज़ में हुई थी गलत कटौती

झारखंड की राजधानी रांची से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), धुर्वा, रांची की कॉमर्स छात्रा अवनि केजरीवाल ने CBSE कक्षा 12वीं की परीक्षा में पुनर्मूल्यांकन के बाद पूरे 500 में से 500 अंक हासिल कर देश की राष्ट्रीय टॉपर बनने का गौरव हासिल किया है।

शुरुआत में मिले थे 95.2 प्रतिशत अंक

13 मई को जब CBSE का परिणाम घोषित हुआ था, तब अवनि को कुल 95.2 प्रतिशत यानी लगभग 476 अंक मिले थे। उनके अंग्रेज़ी (English Core) विषय में 19 अंक और बिज़नेस स्टडीज़ में 5 अंक की कटौती की गई थी। अंकों के लिहाज़ से यह परिणाम बेहतरीन माना जा सकता था, लेकिन अवनि को यकीन था कि उनकी वास्तविक परफॉर्मेंस इससे बेहतर अंकों की हकदार है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जब उनका परिणाम आया था, तब परिवार वाले उनके अंकों से संतुष्ट थे, लेकिन वे खुद संतुष्ट नहीं थीं। अपने इस विश्वास के आधार पर अवनि ने CBSE के पोस्ट-रिजल्ट रिव्यू मैकेनिज्म के तहत अंक सत्यापन (मार्क्स वेरिफिकेशन) और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया।

दो चरणों में हुई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया

CBSE की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हुई पहले छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई गई, और इसके बाद ही मार्क्स वेरिफिकेशन व रीवैल्यूएशन के लिए आवेदन का विकल्प दिया गया। बोर्ड द्वारा हाल ही में इस सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के नतीजे जारी किए गए, जिसमें अवनि की उत्तर पुस्तिकाओं का विस्तृत पुनर्आकलन (reassessment) किया गया। इस पुनर्मूल्यांकन का नतीजा चौंकाने वाला रहा 22 जून 2026 को CBSE के संशोधित परिणाम में पुष्टि हुई कि समीक्षा प्रक्रिया में अवनि के 24 अंक वापस जोड़े गए, जिससे उनके पांच मुख्य विषयों अंग्रेज़ी, अकाउंटेंसी, बिज़नेस स्टडीज़, इकोनॉमिक्स और एप्लाइड मैथमेटिक्स में पूरे 100-100 अंक हो गए। इसके अतिरिक्त, उनके वैकल्पिक विषय ग्राफिक्स (Graphics) में उन्हें 99 अंक मिले।

“हमें 500 अंकों की उम्मीद नहीं थी”

ANI से बातचीत में अवनि ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि सभी बहुत खुश हैं और उन्हें 500 अंक मिलने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि अंग्रेज़ी में 19 अंकों की कटौती उनके लिए अप्रत्याशित थी, क्योंकि यह उनका सबसे पसंदीदा और सबसे मज़बूत विषय था इसी वजह से उन्होंने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। उन्होंने यह भी बताया कि बिज़नेस स्टडीज़ में भी 5 अंक काटे गए थे, जबकि तीन विषयों में उन्हें पहले से ही 100/100 अंक मिले हुए थे। अब उनका स्कोर 24 अंक बढ़ गया है। 

स्कूल और शिक्षकों में खुशी की लहर

DPS रांची की प्रिंसिपल डॉ. जया चौहान ने अवनि की इस उपलब्धि को पूरे स्कूल परिवार के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने कहा कि अवनि की यह असाधारण उपलब्धि उनकी मेहनत, शैक्षणिक उत्कृष्टता और अदम्य दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, और उन्होंने देशभर के छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। 

बिज़नेस परिवार से हैं अवनि, माता-पिता ने जताई खुशी

अवनि का परिवार रांची का एक व्यापारिक परिवार है — उनके पिता मितेश केजरीवाल खाद्य तेल (एडिबल ऑयल) का व्यवसाय चलाते हैं, जबकि उनकी माता पूनम केजरीवाल गृहिणी हैं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अवनि हमेशा से अनुशासित और एकाग्रचित रही हैं, और उनकी इस सफलता का राज़ निरंतर कठिन परिश्रम, प्रभावी समय-प्रबंधन और विषयों की गहरी वैचारिक समझ है।

डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी उठे थे सवाल

गौर करने वाली बात यह है कि संशोधित (रिवाइज्ड) पुनर्मूल्यांकन प्रणाली को बोर्ड की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पर जताई गई चिंताओं के बीच लागू किया गया था। यानी अवनि का मामला यह भी रेखांकित करता है कि बड़े पैमाने पर होने वाले डिजिटल मूल्यांकन में मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश बनी रहती है, और छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन का विकल्प कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

शिक्षा जगत के लिए बनी प्रेरणा

शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षकों ने अवनि की कहानी को देशभर के छात्रों, खासकर उन छात्रों के लिए एक सशक्त प्रेरणा बताया है जो आधिकारिक माध्यमों से अपने हक के अंकों के लिए लड़ने में विश्वास रखते हैं। निराशा से राष्ट्रीय गौरव तक का उनका यह सफर आत्मविश्वास और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करता है। अवनि केजरीवाल की यह कहानी न सिर्फ झारखंड और रांची बल्कि छोटे शहरों से निकलने वाले छात्रों के लिए भी एक मिसाल बन गई है, जो यह साबित करती है कि सही प्रक्रिया और दृढ़ संकल्प से असंभव लगने वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

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