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एशियाई खेलों का ऐतिहासिक कांस्य भारतीय रोइंग के लिए एशियाई खेलों का ऐतिहासिक कांस्य भारतीय रोइंग के लिए

एशियाई खेलों का ऐतिहासिक कांस्य भारतीय रोइंग के लिए नई शुरुआत : सतनाम सिंह

Men’s doubles at the Aichi-Nagoya 2026 Asian Games नई दिल्ली। भारतीय रोवर सतनाम सिंह का मानना है कि आइची-नागोया 2026 एशियाई खेलों में पुरुष डबल स्कल्स में जीता ऐतिहासिक कांस्य पदक भारत में रोइंग के लिए सिर्फ लंबे इंतजार का अंत नहीं है, बल्कि इस खेल के लिए नए रास्ते खुलने की शुरुआत भी है।

सतनाम ने गुरुवार को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) मीडिया से कहा, “जो रास्ते अब तक बंद थे, वे अब खुल गए हैं। अब हम उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में इस स्पर्धा में और पदक जीतेंगे और इससे भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे।”

भारत ने 1951 में एशियाई खेलों की शुरुआत के बाद से पुरुष डबल स्कल्स स्पर्धा में कभी पदक नहीं जीता था। पंजाब के सतनाम ने सलमान खान के साथ मिलकर भारत को इस स्पर्धा का पहला पदक दिलाया। दोनों ने नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स में 6 मिनट 13.25 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। Men’s doubles at the Aichi-Nagoya 2026 Asian Games

यह सतनाम का एशियाई खेलों में दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने हांगझोउ एशियाई खेलों में क्वाड्रुपल स्कल्स में कांस्य पदक जीता था। सतनाम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने से खिलाड़ियों के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है और दबाव कम होता है। उन्होंने कहा, “अनुभव भी बहुत महत्वपूर्ण है। जब कोई खिलाड़ी नया होता है तो प्रतियोगिता में स्वाभाविक रूप से दबाव रहता है। जैसे-जैसे आप खेलते रहते हैं, आपका अनुभव बढ़ता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और डर कम होने लगता है। किसी खिलाड़ी के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।”

सतनाम का मानना है कि भारतीय रोइंग में बदलते सहयोग और प्रशिक्षण ढांचे ने देश के खिलाड़ियों को दुनिया की शीर्ष रोइंग टीमों के करीब पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना के तहत यूरोप में प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर इस बदलाव का एक बड़ा कारण रहा है।

उन्होंने कहा, “यह पहली बार था जब हमने यूरोप में प्रशिक्षण शिविर लगाए। हमें एशियाई खेलों से पहले दुनिया की कुछ शीर्ष टीमों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर भी मिला। इससे हमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ अपने स्तर को समझने का मौका मिला।”

सतनाम ने कहा, “पहले हम काफी पीछे थे। लेकिन अब जब हम यूरोपीय देशों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो उनसे करीब तीन से चार सेकंड पीछे रहकर दौड़ पूरी कर रहे हैं। जैसे-जैसे कोच हमारा समर्थन जारी रख रहे हैं, खेल में नई चीजें और नई तकनीक आ रही हैं और हम लगातार मेहनत कर रहे हैं। इसी वजह से भारतीय रोइंग में काफी प्रगति हो रही है।”

लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक को लेकर सतनाम ने कहा कि अब उनका लक्ष्य अधिक से अधिक स्पर्धाओं में क्वालीफाई करना और फाइनल तक पहुंचना है।

उन्होंने कहा, “फिलहाल हम लॉस एंजिल्स ओलंपिक को लेकर बहुत आशावान हैं। हमारा प्रयास अधिक से अधिक स्पर्धाओं में क्वालीफाई करने का होगा। अगर हम अतीत में भारत को देखें तो हम इस स्तर पर नहीं थे। लेकिन अब, जैसा कि मैंने कहा, हम यूरोपीय देशों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और उनसे केवल करीब तीन से चार सेकंड पीछे रह रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले हम काफी पीछे थे, लेकिन कोचों के लगातार समर्थन, खेल में नई चीजों और नई तकनीक के आने तथा हमारी लगातार मेहनत से भारतीय रोइंग में काफी प्रगति हो रही है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर हम एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक भी जीत सकते हैं। हम हमेशा इसके लिए प्रयास करते रहेंगे। और ओलंपिक में हमारी उम्मीद है कि हम हिस्सा लें और फाइनल तक पहुंचने के लिए पूरा जोर लगाएं।”

Men’s doubles at the Aichi-Nagoya 2026 Asian Games

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