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नोएडा DM मेधा रूपम के वेतन से कटेगा ₹5 लाख हर्जाना, सर्विस रिकॉर्ड पर प्रतिकूल टिप्पणी नोएडा DM मेधा रूपम के वेतन से कटेगा ₹5 लाख हर्जाना, सर्विस रिकॉर्ड पर प्रतिकूल टिप्पणी

नोएडा DM मेधा रूपम के वेतन से कटेगा ₹5 लाख हर्जाना, सर्विस रिकॉर्ड पर प्रतिकूल टिप्पणी

लखनऊ/नोएडा। नोएडा में अप्रैल 2026 के मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA/रासुका) लगाने का फैसला गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को महंगा पड़ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को NSA डिटेंशन ऑर्डर रद्द करते हुए सख्त टिप्पणियां की थीं। सोमवार 7 सितंबर को जारी विस्तृत आदेश में कोर्ट ने आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह रकम डीएम मेधा रूपम से लेकर रिपोर्ट बनाने वाले SHO तक, NSA लगाने की प्रक्रिया में शामिल सभी जिम्मेदार अफसरों के वेतन से वसूली जाएगी। साथ ही इन अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड में कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने का भी आदेश दिया गया है।

आकृति चौधरी (लगभग 24-25 वर्ष) दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास स्नातक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अप्रैल में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और साप्ताहिक छुट्टी जैसे मुद्दों को लेकर मजदूरों का आंदोलन हुआ। पुलिस ने 11 अप्रैल शाम को आकृति को हिरासत में लिया और 12 अप्रैल को गिरफ्तारी दिखाई। 13 अप्रैल को आंदोलन में हिंसा हुई। बाद में उन पर NSA लगाकर करीब पांच महीने तक बिना मुकदमा चलाए हिरासत में रखा गया। NSA के तहत एक साल तक बिना ट्रायल जेल में रखा जा सकता है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि आकृति को हिंसा से दो दिन पहले गिरफ्तार किया गया था और उन्हें जिम्मेदार ठहराने के पर्याप्त सबूत नहीं थे। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बिना दिमाग लगाए और निष्पक्ष जांच किए बिना NSA आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने इसे “अभिमानपूर्ण” और “उपहास के लायक” करार दिया। अदालत ने माना कि डीएम ने आकृति पर NSA लगाकर उदाहरण पेश करने की कोशिश की ताकि लोग मजदूर आंदोलन के समर्थन में सड़क पर न उतरें, जो संविधान प्रदत्त अधिकार है।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां उल्लेखनीय हैं। खंडपीठ ने कहा कि आईएएस और आईपीएस अफसर सेवा में आने से पहले ईमानदारी और निष्पक्षता की शपथ लेते हैं, जो संविधान के प्रति निष्ठा है, राजनीतिक नेतृत्व के प्रति नहीं। अगर अफसर शपथ तोड़ेंगे तो उत्तर प्रदेश के लोग उन्हें अंग्रेजी सल्तनत की निशानी की तरह देखेंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि पथभ्रष्ट और निरंकुश अफसरों के आचरण से यूपी “दमनकारी राज्य” या “ऑरवेलियन डिस्टोपिया” बन सकता है। डीएम मेधा रूपम को “निष्ठा की शपथ के उल्लंघन” का दोषी ठहराया गया।

आकृति ने 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। कोर्ट ने 5 लाख रुपये पर्याप्त माना और निर्देश दिया कि यह राशि बिना दिमाग लगाए आदेश पारित करने वाली डीएम, SHO और संबंधित सभी अफसरों के वेतन से काटी जाए। सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने का आदेश भी दिया गया ताकि भविष्य में जवाबदेही सुनिश्चित हो।

मेधा रूपम 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और जुलाई 2025 से गौतम बुद्ध नगर की पहली महिला डीएम हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। NSA लगाने की प्रक्रिया थाने से शुरू होकर एसपी/पुलिस कमिश्नर, डीएम, सलाहकार बोर्ड और गृह विभाग तक जाती है। कोर्ट ने पूरे चेन को जिम्मेदार ठहराया।

हालांकि NSA रद्द होने के बावजूद आकृति की तुरंत रिहाई नहीं हुई है। उन पर आंदोलन से जुड़े कई एफआईआर दर्ज हैं। कुछ मामलों में जमानत मिल चुकी है, बाकी में प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने कहा कि अन्य मामलों में जरूरत न होने पर रिहाई हो। यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही, व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) और NSA के दुरुपयोग पर महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि शक्ति का इस्तेमाल संविधान की सीमा में ही होना चाहिए।

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