AI बना ठगी का औजार: आधार कार्ड की सुरक्षा दीवार को चकमा देने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में एक गिरोह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डीपफेक तकनीक का सहारा लिया है। यह मामला तब सामने आया जब एक स्थानीय व्यापारी ने अपने बैंक से दो दिनों तक OTP न मिलने पर पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि अपराधी डीपफेक वीडियो और ऑडियो का इस्तेमाल कर आधार वेरिफिकेशन प्रक्रिया को धोखा दे रहे थे, जिससे बिना OTP के ही फर्जी लेन-देन संभव हो गया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्यों ने AI टूल्स जैसे डीपफेक सॉफ्टवेयर का उपयोग कर व्यापारी के चेहरे और आवाज की नकली वीडियो-ऑडियो क्लिप्स तैयार कीं। इनका इस्तेमाल बैंकिंग ऐप्स और आधार-लिंक्ड सर्विसेज पर वीडियो KYC या वॉयस वेरिफिकेशन के दौरान किया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “गिरोह ने चीनी ऐप्स और ओपन-सोर्स AI मॉडल्स जैसे FaceSwap और ElevenLabs का सहारा लिया। इससे वे रीयल-टाइम में फर्जी वीडियो कॉल्स जेनरेट कर आधार की बायोमेट्रिक चेक को बायपास कर रहे थे।” प्रारंभिक जांच में गिरोह ने कम से कम 15 व्यापारियों को निशाना बनाया, जिसमें 50 लाख रुपये से अधिक की ठगी हुई।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए वीडियो वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया था, लेकिन AI की प्रगति ने इसे चुनौती दे दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक टेक्नोलॉजी अब इतनी उन्नत हो चुकी है कि सामान्य आंखें असली और नकली में फर्क नहीं कर पातीं। साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. राहुल मेहता ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया, “भारत में डीपफेक से जुड़े 300% मामलों की बढ़ोतरी हुई है। बैंकों को अब AI डिटेक्शन टूल्स जैसे Microsoft Video Authenticator अपनाने होंगे।”
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों—राहुल पटेल, विजय शाह और अज्ञात तकनीकी सहयोगी—को गिरफ्तार किया। उनके पास से दो लैपटॉप, हाई-एंड GPU सिस्टम और डीपफेक जेनरेटर सॉफ्टवेयर बरामद हुए। पुलिस ने UIDAI और RBI को सूचित कर दिया है। एक अधिकारी ने चेतावनी दी, “OTP बंद होने या अनजान वीडियो कॉल्स पर तुरंत सतर्क हों। हम पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर रहे हैं।” यह घटना देशभर में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है। पिछले साल दिल्ली और मुंबई में इसी तरह के डीपफेक स्कैम्स में 200 करोड़ की ठगी हुई थी। सरकार ने AI मिसयूज रोकने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी अपग्रेड के साथ-साथ जन जागरूकता जरूरी है।

