ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि पर नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप

पुलिस के अनुसार, मामले से जुड़े फुटेज को सबूत के तौर पर सौंपा गया है, जिसमें वीरमणि से जुड़े दृश्य मौजूद बताए जा रहे हैं। यह फुटेज सबसे पहले तमिलनाडु कांग्रेस के नेता एमपी रंजन कुमार ने पुलिस को सौंपा था। कुमार का कहना है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर मामले की जांच की मांग की थी, लेकिन शुरुआत में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सत्तारूढ़ डीएमके ने फुटेज की स्पष्टता और प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं। वीरमणि को उनके सहयोगियों शांति और महेंद्र सिम्हन के साथ गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां इन सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले की शुरुआती जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी समन जारी किया गया है।

कैसे सामने आया मामला

यह मामला अक्टूबर 2025 में तब सामने आया जब एक एनजीओ के माध्यम से चेन्नई पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी गई, जिसमें कथित तौर पर एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न से जुड़े दृश्य होने का दावा किया गया। इसके आधार पर वीरमणि के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

करीब पांच महीने चली शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने पर्याप्त सबूतों की कमी और पीड़िता की पहचान न हो पाने का हवाला देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। हालांकि, एक विशेष पॉक्सो अदालत ने इस क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए आगे की जांच के आदेश दिए, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ लिया। नए सिरे से हुई जांच में घटनास्थल की पहचान हुई और कुछ हफ्तों के भीतर वीडियो में दिखी पीड़िता समेत अन्य पीड़िताओं का भी पता चला।

कई नाबालिग पीड़िताओं की पहचान

विस्तृत जांच में अब तक सात से अधिक ऐसी महिलाओं की पहचान हो चुकी है, जो घटना के समय नाबालिग थीं। जांच अधिकारियों के अनुसार पीड़िताएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। पुलिस के आरोपों के मुताबिक, वीरमणि की सहयोगी बनीं शांति ने चेन्नई के अलग-अलग इलाकों से 12 से 16 साल की उम्र की लड़कियों की पहचान करने में मदद की। इन लड़कियों को टेनाम्पेट स्थित एक किराए के मकान में ले जाया जाता था, जो जांच में एक अहम स्थान बनकर सामने आया है। आरोप है कि पीड़िताओं को पैसे और उपहार दिए जाते थे।

पुराने केस की जांच पर भी सवाल

निवेशक अब उस किराए के मकान की भी जांच कर रहे हैं, जिसे कथित अपराध में इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि शुरुआती जांच में कोई चूक हुई थी या किसी ने जांच को कमजोर करने या बाधित करने की कोशिश की थी। मामले के बढ़ते दायरे को देखते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने इसका संज्ञान लेते हुए नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि जांच में कोई कमी न रहे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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