US-Iran War: ईरान से युद्धविराम टूटा, हमलों में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत, अब तक 17 जवान शहीद, जॉर्डन और इराक में मिसाइल-ड्रोन हमले

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बनी नाजुक युद्धविराम व्यवस्था टूटने के बाद मध्य-पूर्व में तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है। बीते वीकेंड हुए हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और सैकड़ों जवान घायल हुए हैं। इसके साथ ही 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से अब तक शहीद अमेरिकी सैनिकों की संख्या 17 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 500 जवान घायल हो चुके हैं। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने सोमवार को यह अपडेटेड आंकड़ा जारी किया।

किन सैनिकों की हुई मौत

पेंटागन ने जिन तीन सैनिकों की पहचान की है, उनमें शामिल हैं — प्राइवेट फर्स्ट क्लास इसाबेला गोंज़ालेज़ (19), जो जॉर्डन के मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर शुक्रवार को हुए ईरानी मिसाइल-ड्रोन हमले में मारी गईं। वे एयर एंड मिसाइल डिफेंस क्रू सदस्य के तौर पर सेवा दे रही थीं। सेना ने उन्हें मरणोपरांत प्रमोशन दिया है। दूसरे शहीद हैं फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहन, जिनकी मौत उसी हमले में लगी चोटों के कारण शनिवार को हुई। वे हवाई नेशनल गार्ड से सेना में शामिल हुए थे और बाद में ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी से कमीशन प्राप्त अफसर बने थे। उन्हें मरणोपरांत कैप्टन का दर्जा दिया जाएगा। तीसरे सैनिक हैं सार्जेंट माइकल इमैनुएल स्विंटन (30), जो इराक के एरबिल एयर बेस पर एक मार गिराए गए ईरानी ड्रोन को नष्ट करने की कार्रवाई के दौरान रविवार को मारे गए। इस घटना की जांच जारी है। इसके अलावा जॉर्डन हमले से जुड़ा एक और सैनिक अब भी लापता है, जिनके अवशेषों की पहचान का काम चल रहा है।

कैसे टूटा युद्धविराम

जून के मध्य में हुए एक समझौते के तहत 60 दिन का युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन यह शुरू से ही अस्थिर बना रहा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत चल रही थी, लेकिन अमेरिका ने ही अपनी प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन में आक्रामक कार्रवाई की, जिसके बाद ईरान ने अपनी सभी प्रतिबद्धताएं निलंबित कर दीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बीते हफ्ते कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक जहाज पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद उन्हें लगता है कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। इससे पहले भी टकराव की एक तयशुदा कड़ी सामने आती रही है ईरान व्यापारिक जहाजों पर हमला करता, अमेरिका सीमित जवाबी कार्रवाई करता, और फिर ईरान बहरीन-कुवैत जैसे अमेरिका समर्थक खाड़ी देशों पर हमला करता। हाल के हमलों की तीव्रता पहले से कहीं ज़्यादा मानी जा रही है।

तेल की कीमतों और व्यापार पर असर

तनाव बढ़ने के साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाला जहाजी यातायात तेज़ी से घटा है। युद्ध से पहले रोज़ाना करीब 110 जहाज इस जलमार्ग से गुजरते थे, जो अब घटकर मुट्ठी भर रह गए हैं। ईरान द्वारा दो सुपरटैंकरों पर हमले और यूएई के दो टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी फिर शुरू कर दी। इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है, जिसमें एक ही दिन में तक़रीबन साढ़े नौ फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी अड्डे लंबे समय तक अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते रहे, इसलिए वहां का बुनियादी ढांचा हल्के मैटीरियल — कंटेनर, ट्रेलर और सैंडबैग — से बना है, जो आधुनिक मिसाइल-ड्रोन हमलों को झेलने के लिए नहीं बनाया गया। इराक-अफगानिस्तान युद्धों के दौर की कंक्रीट दीवारें भी मुख्यतः गोलीबारी और मोर्टार हमलों से बचाव के लिए थीं, सीधे मिसाइल हमलों के लिए नहीं। हालिया हमलों के बाद अमेरिकी रक्षा अधिकारी अड्डों को ड्रोन-रोधी बनाने पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं।

आगे क्या

कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की भारी कमी नज़र आ रही है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पहले ईरान के सैन्य ढांचे को “ऐतिहासिक जीत” के साथ तबाह करने का दावा कर चुके हैं, लेकिन ताज़ा हमले दिखाते हैं कि ईरान अब भी अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाने में सक्षम है। ऐसे में आने वाले दिनों में और तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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