राम मंदिर दान घोटाले में FIR दर्ज, SIT की सिफारिश पर भरोसे की परीक्षा

अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान के कथित गबन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर अयोध्या पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है। इस मामले में 17 से 24 लोगों को आरोपी बनाए जाने की खबर है, जिसमें ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

SIT की रिपोर्ट में 2020 से अब तक राम मंदिर में आए करीब ₹3,500 करोड़ के दान के प्रबंधन में गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है। हुंडियों से निकले नकद की गिनती में कमी, लेखा-जोखा में गड़बड़ी, मूल्यवान वस्तुओं (जैसे सिंधी समुदाय द्वारा दान किए गए 200 किलो चांदी के ईंट) का हिसाब न मिलना और सीसीटीवी फुटेज का छोटा रिटेंशन पीरियड जैसी बातें सामने आई हैं। ऑडिट रिपोर्टों की अनदेखी और पर्यवेक्षण की कमी को भी प्रमुख लापरवाही माना गया है।

मामला कैसे शुरू हुआ?

विवाद जून 2026 के पहले सप्ताह में तब फटा जब मंदिर के एक कर्मचारी महिपाल सिंह या अन्य स्टाफ द्वारा कथित तौर पर चढ़ावे की राशि गबन करने का वीडियो वायरल हुआ। एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा या रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास से ₹10 लाख से अधिक की नकदी बरामद हुई, जिसे गोबर के ढेर या अलमारी में छिपाया गया था। इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक जांच शुरू की और UP सरकार से SIT गठन की मांग की। SIT ने 40 कर्मचारियों को सस्पेंड किया, ₹2 करोड़ की राशि वसूल की और आगे की जांच में 17-24 लोगों के नाम सामने आए। 2020 की एक ऑडिट रिपोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुकी थी कि कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) नहीं है, नकद प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी है और बड़े पैमाने पर कैश हैंडलिंग जोखिम भरी है। इन चेतावनियों पर ध्यान न देने का आरोप अब ट्रस्ट पर भी लग रहा है।

ट्रस्ट और सरकार की भूमिका

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बड़े स्तर पर चोरी से इनकार किया है लेकिन पर्यवेक्षण में कमियों को स्वीकार किया। SIT की सिफारिश पर ट्रस्ट ने खुद शिकायत दर्ज कराई, जिसमें ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन सहित अन्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संवेदनशील मुद्दे पर संयम बरतने की अपील की है। VHP ने भी FIR, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई की मांग की है। विपक्षी दलों, खासकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस घोटाले को लेकर सरकार पर हमला बोला है। भक्तों और दानकर्ताओं में आक्रोश है; कई लोग अपनी चांदी की जेवरात या चढ़ावे की रसीद न मिलने की शिकायत कर रहे हैं। कुछ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग कर रही हैं।

आगे क्या?

FIR दर्ज होने के बाद अब पूर्ण जांच, गिरफ्तारियां और ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना है। SIT ने ट्रस्ट को प्रशासक नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह मामला न केवल राम मंदिर की पवित्रता और भक्तों के विश्वास को प्रभावित कर रहा है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर दान प्रबंधन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। भक्तों का चढ़ावा मंदिर के रखरखाव, विकास और भविष्य के कार्यों के लिए है। इस विश्वास को बनाए रखने के लिए पूरी पारदर्शिता, तेज जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। अयोध्या पुलिस और SIT की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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