सरकार ने कमर्शियल LPG पर पाबंदियां हटाई, इंडस्ट्रियल-कमर्शियल ग्राहकों को बड़ी राहत, सप्लाई पूर्व की तरह बहाल

पश्चिम एशिया संकट के कारण लगाई गई अस्थायी पाबंदियों के बाद केंद्र सरकार ने इंडस्ट्रियल और कमर्शियल क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए राहत की बड़ी घोषणा की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG (कमर्शियल LPG) की सप्लाई पर सभी सेक्टर-वाइज प्रतिबंध तुरंत प्रभाव से हटा दिए हैं और सप्लाई को संकट से पहले के सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। पेट्रोलियम सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने आज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस फैसले की जानकारी दी। पत्र में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान घरेलू LPG की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ये प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन अब सप्लाई स्थिति में सुधार होने के साथ इन्हें वापस ले लिया गया है।

संकट की पृष्ठभूमि

पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया (मुख्य रूप से ईरान-इजराइल तनाव) के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग व्यवधान उत्पन्न हुआ था। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा (लगभग 67%) आयात करता है, जिसमें से 90% से अधिक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। इससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में सप्लाई प्रभावित हुई थी। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए C3/C4 स्ट्रीम्स को LPG उत्पादन की ओर मोड़ दिया था और बुल्क LPG सप्लाई पर सख्ती बरती थी। अब स्थिति सामान्य होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन बहाल होने के बाद सरकार ने राहत प्रदान की है। बुल्क LPG सप्लाई को भी पूर्व-संकट खपत के 50% स्तर पर ढील दी गई है, जबकि घरेलू LPG की उपलब्धता न्यूनतम 40 TMT (हजार मीट्रिक टन) प्रतिदिन बनाए रखने का प्रावधान जारी रखा गया है।

उद्योग जगत पर असर

यह फैसला होटल, रेस्तरां, अस्पताल, छोटे उद्योगों, टैक्सी/ट्रांसपोर्ट और अन्य कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा। संकट के दौरान कई क्षेत्रों में LPG की कमी से परिचालन प्रभावित हुआ था। अब सामान्य सप्लाई बहाल होने से उत्पादन लागत कम होने और व्यवसाय सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है। मंत्रालय ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी जारी रखने का संकेत दिया है, ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम हो सके।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल तत्काल राहत देगा बल्कि अर्थव्यवस्था के इन महत्वपूर्ण सेक्टरों को स्थिरता प्रदान करेगा। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया है कि दीर्घकालिक समाधान के रूप में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक आयात स्रोतों को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार का यह फैसला आम उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखते हुए व्यावसायिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में एक संतुलित कदम माना जा रहा है। आगे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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