दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) परियोजना को नई गति देने के लिए गौतमबुद्ध नगर जिले की दादरी तहसील में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। रेल मंत्रालय के रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने 22 जून 2026 को धारा 20-ई के तहत अधिसूचना जारी कर सात गांवों से कुल 47.1435 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह जमीन मुख्य रूप से मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) और बॉर्डर रोड के निर्माण के लिए ली जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रभावित गांवों में चिटहेरा, बिसाहड़ा, चांदपुर, पल्ला, पटाड़ी, कटहैरा और रामगढ़ी धामगढ़ शामिल हैं। जिला प्रशासन ने पहले धारा 20-ए के तहत प्रक्रिया शुरू की थी, अब 20-ई अधिसूचना के साथ आपत्तियां दर्ज करने की समयसीमा निर्धारित कर दी गई है। संबंधित भूमि मालिकों को 15 दिनों के अंदर अपने दावे और आपत्तियां जमा करने को कहा गया है।
मुआवजा और पुनर्वास का प्रावधान
एडीएम (भूमि अधिग्रहण) बच्चू सिंह ने बताया कि प्रभावित किसानों को सर्किल रेट और बाजार दर में से जो भी अधिक हो, उसके अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के पूर्ण लाभ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। प्राधिकरण ने विकसित भूखंड देने का भी प्रस्ताव रखा है। मुआवजे की दरों का निर्धारण अगले तीन माह के भीतर पूरा करने की तैयारी है।
DMIC का महत्व और क्षेत्रीय प्रभाव
डीएमआईसी परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी औद्योगिक पहल है, जो दिल्ली से मुंबई तक का औद्योगिक गलियारा विकसित कर रही है। दादरी-नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यह मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब और लॉजिस्टिक्स सेंटर के रूप में विकसित होगा। इससे माल परिवहन तेज होगा, लागत कम होगी और क्षेत्र में नए उद्योगों के साथ-साथ रोजगार के हजारों अवसर सृजित होंगे।यह हिस्सा नोएडा-ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-एनसीआर से पश्चिमी बंदरगाहों तक सीधा कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे उत्तर भारत का निर्यात बढ़ेगा और क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा। इससे पहले भी दादरी क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, जो पूरे DMIC सब-रीजन के विकास का आधार बनेगी।
किसानों की चिंताएं और प्रशासन की तैयारियां
भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान मुआवजे की पर्याप्तता और समय पर भुगतान को लेकर चिंतित हैं। कई किसान परिवारों की आजीविका इस जमीन पर निर्भर है। प्रशासन का दावा है कि सभी नियमों का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। डीएमआईसी के तहत दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन (DNGIR) को ‘न्यू नोएडा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर औद्योगिक टाउनशिप, स्मार्ट सिटी तत्व और बेहतर कनेक्टिविटी शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने से पूरे क्षेत्र का चेहरा बदलने की उम्मीद है।
अधिक जानकारी के लिए: जिला प्रशासन और आरएलडीए के अधिकारी किसानों से निरंतर संवाद बनाए हुए हैं। आपत्तियों के निपटान के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह विकास उत्तर प्रदेश की औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई देने वाला कदम साबित हो सकता है, लेकिन स्थानीय किसानों के हितों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

