कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स और गैर-शिक्षण स्टाफ की हड़ताल सोमवार, 15 जून 2026 से शुरू होकर लगातार नौवें दिन भी जारी है। नर्सिंग स्टाफ, ओटी व लैब तकनीशियन, डेटा एंट्री ऑपरेटर, क्लर्क और हाउसकीपिंग सहित लगभग 700 कर्मचारी संस्थान परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है।
हड़ताल की मुख्य वजह प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले 13-14 साल से जिम्स में सेवाएं दे रहे हैं और कोविड-19 महामारी के दौरान जोखिम उठाकर काम किया था, जब प्रशासन ने उन्हें स्थायी करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों का आरोप है कि अब वह वादा पूरा किए बगैर नई भर्तियां निकाली जा रही हैं, जिससे पुराने कर्मियों में नौकरी जाने का डर है। उनकी मांग है कि बिना किसी परीक्षा के सीधे नियमितीकरण (Regularisation) किया जाए और मौजूदा 8 से 30 हजार रुपये के बीच के वेतन में बढ़ोतरी हो। अस्पताल सेवाओं पर असर हड़ताल के शुरुआती दिनों में ओपीडी पूरी तरह ठप हो गई थी, हालांकि बाद में आंशिक राहत देखी गई और शनिवार को 600-700 मरीज ओपीडी में पहुंचे। लेकिन ऑपरेशन थियेटर और कई वॉर्डों में सन्नाटा बना हुआ है, सिजेरियन डिलिवरी और अन्य जरूरी सर्जरी टाली जा रही हैं। भर्ती मरीजों की आठ आईसीयू में देखभाल प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों की मौत को तीमारदारों ने हड़ताल और समय पर स्टाफ न मिलने से जोड़ा है, हालांकि अस्पताल निदेशक ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि तीनों मरीज गंभीर बीमारी के चलते भर्ती थे और मौतों का हड़ताल से कोई संबंध नहीं है। इस बिंदु पर स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
बल प्रयोग और दबाव के आरोप धरने पर बैठी कर्मचारी रीना, मंजू, रेखा और सरला जैसी महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है और धरना खत्म करवाने के लिए लाठीचार्ज की चेतावनी मिल रही है। उनका कहना है कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। हालांकि जिला पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने अब तक किसी भी प्रकार के लाठीचार्ज की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है; प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनाती बता रहा है।प्रशासन का रुख जिम्स निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा और नई भर्तियां स्वीकृत खाली पदों पर ही हो रही हैं। उनके अनुसार, बिना परीक्षा के सीधा नियमितीकरण संस्थान के अधिकार क्षेत्र में नहीं, यह राज्य सरकार के स्तर का फैसला है। उन्होंने कर्मचारियों से मरीजों के हित में काम पर लौटने की अपील की और चेतावनी दी कि सोमवार तक हड़ताल न टूटने पर बाहर से, यानी नर्सिंग कॉलेज के छात्रों और नजदीकी जिला अस्पतालों के स्टाफ की मदद से सेवाएं बहाल कराई जाएंगी।
राजनीतिक हस्तक्षेप हड़ताल को समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता विकास प्रधान का समर्थन मिला है, जिन्होंने एसडीएम आशुतोष गुप्ता से कर्मचारियों के हक में हस्तक्षेप की मांग की है। प्रशासन और कर्मचारी यूनियन के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।

