अदानी पर अमेरिकी मुकदमे में बड़ी राहत: वकीलों ने जज से आपराधिक आरोप खारिज करने की अपील की, पहले ही पीछे हटा DOJ

भारतीय अरबपति गौतम अडानी और उनके समूह पर अमेरिकी अदालत में लगाए गए गंभीर आपराधिक आरोपों में महत्वपूर्ण विकास हुआ है। अडानी के वकीलों ने बुधवार को ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस से औपचारिक रूप से मामले को खारिज करने की मांग की। यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने मई 2026 में ही मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर लिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अडानी के वकील रॉबर्ट गिउफ्रा ने जज को लिखे पत्र में कहा कि मामला अमेरिकी कानून की पहुंच से बाहर है और अभियोजन पक्ष भारत में कथित रिश्वतखोरी को साबित नहीं कर पाएगा। गिउफ्रा ने यह भी उल्लेख किया कि DOJ के फैसले से पहले उनके मुवक्किलों और सह-आरोपियों के वकीलों के साथ विस्तृत चर्चाएं और बैठकें हुई थीं।

मामला क्या था?

2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अडानी समूह के अन्य अधिकारियों पर आरोप लगाए थे। आरोप था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर (करीब 250-265 मिलियन डॉलर) की रिश्वत देकर सोलर प्लांट विकसित करने की मंजूरी हासिल की और अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की एंटी-करप्शन नीतियों के बारे में गुमराह करने वाली जानकारी दी। यह कथित साजिश भारत के एक बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट से जुड़ी थी, जिससे अरबों डॉलर का मुनाफा होने की उम्मीद थी। अडानी समूह ने शुरू से ही इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि ये निराधार हैं।

DOJ का फैसला और सेटलमेंट

मई 2026 में DOJ ने मुकदमे को आगे न बढ़ाने का फैसला लिया और जज से आरोपों को “with prejudice” (स्थायी रूप से) खारिज करने की मांग की। विभाग ने इसे “प्रॉसिक्यूटोरियल डिस्क्रिशन” (अभियोजन की विवेकाधीन शक्ति) का मामला बताया और कहा कि आगे संसाधन खर्च नहीं किए जाएंगे।3

इसके साथ ही:

यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के साथ सिविल मामले में सेटलमेंट हुआ, जिसमें गौतम अडानी को 6 मिलियन डॉलर और सागर अडानी को 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ा। अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के लिए यूएस ट्रेजरी को 275 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि अडानी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 बिलियन डॉलर निवेश और हजारों नौकरियां पैदा करने का प्रस्ताव रखा था, हालांकि DOJ ने इसे सीधे मामले से नहीं जोड़ा।

राजनीतिक विवाद और अतिरिक्त संदर्भ

इस फैसले पर अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटरों एलिजाबेथ वॉरेन और रिचर्ड ब्लुमेंथल ने सवाल उठाए और DOJ से जवाब मांगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ट्रंप परिवार से अडानी के संपर्कों का जिक्र भी आया, लेकिन ट्रंप जूनियर की तरफ से इनका इनकार किया गया कि इनका मुकदमे से कोई संबंध था। अडानी समूह के लिए यह राहत महत्वपूर्ण है। समूह बुनियादी ढांचा, बंदरगाह, हवाई अड्डे, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय है। इस मामले ने पिछले डेढ़ साल से समूह की प्रतिष्ठा और शेयर बाजार पर असर डाला था, हालांकि आरोप खारिज होने के बाद सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद है। जज निकोलस गारौफिस को अब औपचारिक मंजूरी देनी है। अगर मंजूरी मिल गई तो अडानी पर लगे आपराधिक आरोप पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।

अडानी समूह का बयान: समूह ने बार-बार कहा है कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करता है और पारदर्शिता बनाए रखता है। यह विकास भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जहां दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार बढ़ रहा है। यह खबर अडानी समूह के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों में पूरी तरह क्लीन चिट मिलने तक निगरानी बनी रहती है। आगे की अपडेट्स के लिए अदालती कार्यवाही पर नजर रखी जा रही है।

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