ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अरिहंत अंबर सोसायटी में टावर से गिरे भारी प्लास्टर की चपेट में आने से 46 वर्षीय निवासी की दर्दनाक मौत, बिल्डर की लापरवाही पर भड़के सैकड़ों परिवार, पुलिस जांच शुरू
लाखों रुपये जोड़कर सपनों का घर खरीदना किसी की जान का दुश्मन बन जाएगा, यह किसने सोचा होगा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अरिहंत अंबर सोसायटी में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया, जब सोसायटी के एक निवासी की टावर से प्लास्टर का बड़ा हिस्सा गिरने के कारण मौत हो गई। घटना ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटियों में घटिया निर्माण और मेंटेनेंस की लापरवाही को बेनकाब कर दिया है।
कैसे हुआ यह हृदयविदारक हादसा
बिसरख कोतवाली क्षेत्र स्थित अरिहंत अंबर सोसायटी के टावर-डी में रहने वाले विकास चावला शनिवार शाम अपने दोपहिया वाहन से घर से मार्केट के लिए निकले थे। विकास एक निजी कंपनी में कार्यरत थे और परिवार के साथ सोसायटी में रहते थे। परिवार में पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल थे। जैसे ही वह टावर के नीचे से गुजरे, ऊपरी मंजिल से प्लास्टर का एक विशाल और भारी टुकड़ा अचानक टूटकर सीधे उनके ऊपर आ गिरा। उन पर सीलिंग के प्लास्टर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया, और आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही सोसायटी में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान विकास चावला (46) पुत्र रविंद्र चावला के रूप में हुई है। उनकी असमय मौत ने पूरे परिवार को बिखेर कर रख दिया है। घर में पत्नी, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
RERA में की थी शिकायत, फिर भी नहीं हुई मरम्मत
यह हादसा किसी अचानक आई आपदा का नतीजा नहीं था यह लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का परिणाम था। साल 2023 में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) ने सोसायटी का हैंडओवर लेने के बाद बिल्डर के खिलाफ रेरा (RERA) का दरवाजा भी खटखटाया था। इसके बाद बिल्डर द्वारा मरम्मत का कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन निवासियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से यह काम पूरी तरह बंद पड़ा हुआ था। हादसे की जानकारी मिलते ही सोसायटी के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। निवासियों का आरोप है कि इमारत की बाहरी दीवारों और बालकनियों से प्लास्टर उखड़ने की शिकायत बार-बार बिल्डर और मेंटेनेंस प्रबंधन से की गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
निवासियों का फूटा आक्रोश, उठाई ये मांगें
घटना के बाद सोसायटी में शोक का माहौल है, जबकि निवासियों ने बिल्डर प्रबंधन की लापरवाही को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। आक्रोशित निवासियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं पहली मांग: बिल्डर प्रबंधन और मेंटेनेंस एजेंसी के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
दूसरी मांग: पूरी सोसायटी का स्वतंत्र तकनीकी एवं स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
तीसरी मांग: दोषी बिल्डर और ठेकेदारों को गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाया जाए।
चौथी मांग: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सभी पुरानी हाईराइज सोसायटियों का तत्काल सर्वेक्षण कराए।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही बिसरख थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सेंट्रल नोएडा के एडिशनल डीसीपी (ADCP) स्वतंत्र सिंह के अनुसार पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। पीड़ित परिवार की मौजूदगी में पंचनामा भरा गया है और परिजनों की ओर से लिखित शिकायत मिलते ही बिल्डर प्रबंधन व जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह पहला मामला नहीं — एक बड़ी समस्या का संकेत
यह हादसा अकेला नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की दर्जनों हाईराइज सोसायटियों में निर्माण की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। तेज निर्माण गति, सस्ती सामग्री और रखरखाव की अनदेखी मिलकर एक विस्फोटक स्थिति बना रही हैं, जिसकी कीमत अब निर्दोष निवासियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। विकास चावला की मौत एक परिवार की त्रासदी भर नहीं है, यह उस व्यवस्था पर एक सवाल है जो रेरा जैसे कानून होने के बावजूद लापरवाह बिल्डरों को बेलगाम छोड़ देती है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाते हैं और क्या इस मौत के बाद कम से कम अन्य सोसायटियों में रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

