फरार होटल मालिक लवकेश बजाज गिरफ्तार; न्यायिक जांच के आदेश, LG ने पूरी दिल्ली में एक महीने का फायर सेफ्टी अभियान शुरू किया
दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में हुए भीषण होटल अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 3 जून को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर ‘फ्लरिश स्टे’ होटल के बेसमेंट में स्थित ‘लेमन ग्रीन’ रेस्टोरेंट में आग भड़की, जो देखते ही देखते पाँच मंजिला इमारत को अपनी लपटों में लेती चली गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 10 भारतीय और 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। हादसे की सबसे दिल दहला देने वाली बात यह है कि मरने वाले अधिकतर लोग वे थे जो आसपास के अस्पतालों में अपने बीमार परिजनों का इलाज करवाने दिल्ली आए थे, और यह होटल उन्हें सस्ती दरों पर ठहरने की जगह देता था।
पूछताछ में आरोपी का चौंकाने वाला कबूलनामा
हादसे के बाद से फरार चल रहे होटल मालिक लवकेश बजाज को दिल्ली पुलिस ने बुधवार की शाम साकेत क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह जब होटल में आग लगी, तो लवकेश बजाज करीब 45 मिनट तक मौके पर ही खड़ा रहा, लेकिन जैसे ही हादसे की गंभीरता का अहसास हुआ, वह वहाँ से फरार हो गया। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी लवकेश बजाज ने दावा किया कि उसके पास होटल के रोजमर्रा के कामकाज को खुद देखने का समय नहीं था। उसने इस पूरी व्यवस्था और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी किसी दूसरे व्यक्ति को सौंप रखी थी। बजाज ने पुलिस को बताया कि इमारत में कमरों का आकार बढ़ाने जैसे बदलाव भी उसी दूसरे व्यक्ति के सुझाव पर किए गए थे। जब उससे बिना फायर NOC के होटल चलाने पर सवाल किया गया तो आरोपी ने बेशर्मी से जवाब दिया, “दिल्ली में सब कुछ चलता है।” पूछताछ के दौरान बजाज ने यह भी स्वीकार किया कि इस व्यावसायिक इमारत के पास अनिवार्य फायर NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं था।
लापरवाही पर लापरवाही — पाँच बड़े जुर्म एक साथ
जाँच में सामने आई जानकारी के मुताबिक इस होटल में नियमों का खुला मखौल उड़ाया जा रहा था, होटल को सिर्फ 6 कमरों का लाइसेंस मिला था, लेकिन वहाँ करीब 21 से 25 कमरे थे और बेसमेंट में भी मेहमान ठहराए जाते थे। होटल में फायर क्लियरेंस नहीं था, सिर्फ एक संकरी एंट्री-एग्जिट थी और फायर एस्केप की कोई व्यवस्था नहीं थी। आग सुबह करीब 8:30 बजे भड़की और तेजी से पाँच मंजिला संकरी इमारत में फैल गई, जिसमें सिर्फ एक प्रवेश-निकास बिंदु था, खिड़कियाँ स्थायी रूप से बंद थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर-संचालित था।
मंजर था भयावह — गद्दे बिछाकर बचाई जानें
फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब 40 लोगों को रेस्क्यू किया। वहीं स्थानीय लोगों ने गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाई, जिनमें तीसरी-चौथी मंजिल से कूदने वाले भी शामिल हैं। हादसे में 21 लोगों की मौत हुई। बताया गया कि मरने वालों में से अधिकतर विदेशी नागरिक थे। इस घटना में 40 से अधिक लोग झुलस भी गए और बचाव अभियान के दौरान 10 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। हादसे की सबसे दर्दनाक कहानी गुरुग्राम के अग्रवाल परिवार की है, जिसके आठ सदस्यों की एक साथ मौत हो गई। 21 विदेशी नागरिक घायल हैं, जिनमें से 10 वेंटिलेटर पर हैं। इनमें लाइबेरिया, मोजाम्बिक, नाइजीरिया और कांगो के नागरिक शामिल हैं।
कार्रवाई: गिरफ्तारी, जाँच और पूरी दिल्ली में अभियान
मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए जा चुके हैं और संपत्ति के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने हादसे के कुछ घंटों बाद पूरी राजधानी में एक महीने का व्यापक फायर सेफ्टी अभियान शुरू करने का आदेश दिया। 4 जून से शुरू यह अभियान होटल, लॉज, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थानों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर केंद्रित होगा। शहर में अवैध संपत्तियों और अनधिकृत गेस्ट हाउसों के खिलाफ शहरव्यापी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे प्रतिष्ठानों को सील किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर दिल्ली की व्यावसायिक और रिहायशी इमारतों में फायर सेफ्टी और अवैध रूप से चल रहे लॉजिंग बिजनेस के बड़े सिंडिकेट को बेनकाब कर दिया है।
मुआवजा और आगे की राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजे का ऐलान किया है। पुलिस आज (4 जून) आरोपी लवकेश बजाज को अदालत में पेश करते हुए रिमांड की माँग कर सकती है। यह हादसा एक बार फिर उस भयावह सच्चाई को उजागर करता है जो राजधानी दिल्ली में वर्षों से चली आ रही है — जहाँ नियमों को ताक पर रखकर धंधा चलाया जाता है और जब त्रासदी होती है, तब शासन-प्रशासन की नींद टूटती है।

